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Challenge for Nitish Government: बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान बंपर वोटिंग और NDA की प्रचंड जीत नीतीश कुमार की व्यक्तिगत और राजनीतिक मजबूती का प्रमाण है, इसी वजह से नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, लेकिन नए कार्यकाल में उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं. मुख्य चुनौती जनता से नौकरी, रोज़गार, मुफ़्त बिजली को लेकर किए वादे पूरे करना कमजोर आर्थिक बजट वाले प्रदेश में उनके लिए मुख्य चुनौती होगा. हालांकि वह महाराष्ट्र की तरह बिहार की योजनाओं में बदलाव कर सकते हैं. वहीं, सेहत और बढ़ती उम्र को लेकर भी नीतीश कुमार के सामने गठबंधन में बैलेंस बनाए रखना भी मुख्य चुनौतियों में शामिल है, उन्हें जेडीयू की सेकंड लाइन लीडरशिप तैयार करनी है.
आज पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में बिहार की नवनिर्वाचित सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। आज के इस विशेष अवसर पर बिहार के लोगों को मेरा नमन, हृदय से आभार एवं धन्यवाद।
— Nitish Kumar (@NitishKumar) November 20, 2025
आज शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को… pic.twitter.com/Aqe3159BJV
नीतीश कुमार के सामने मुख्य चुनौती जनता के वादे पूरे करने की है. डेढ़ करोड़ महिलाओं को 10 हजार रुपये देना मुश्किल काम है. वहीं, एक करोड़ से ज्यादा लोगों को सरकारी नौकरी और रोजगार, किसान सम्मान निधि को बढ़ाकर 9 हजार रुपये करना, 50 लाख नए मकान, 125 यूनिट मुफ्त बिजली, चार नए शहरों में मेट्रो ट्रेन, ईबीसी वर्ग की जातियों को 10 लाख रुपये तक सहायता करना भी एनडीए के घोषणा पत्र में शामिल है. इन योजनाओं को पूरा करना मौजूदा वित्तीय हालत को देखते हुए काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है. हालांकि महाराष्ट्र में लाडली बहन योजना की तरह मुख्यमंत्री नीतीश बिहार की योजनाओं में भी बदलाव कर लागू कर सकते हैं.
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बिहार में सीटों में नंबर दो पार्टी होने के बावजूद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने हैं. अंतिम चुनाव के नाम पर जनता के सम्मान और विदाई में वोट तो दे दिया, लेकिन नीतीश कुमार की उम्र और सेहत को देखते हुए इस बार वादे पूरे करने का दबाव भाजपा पर भी होगा, क्योंकि भाजपा बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. नीतीश कुमार का ऐसे में ऐसे में गठबंधन में बैलेंस बनाए रखना, BJP की महत्वाकांक्षाओं को कंट्रोल करना और JD(U) में दूसरी लाइन की लीडरशिप तैयार करना भी उनकी चुनौती में शामिल होगा.
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बिहार में लालू राज के कार्यकाल को जंगलराज का नाम देकर भाजपा ने जिस तरह उसे विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनाया, उससे लालू यादव की राजद पिछड़ती ही चली गई. इस बात को तेजस्वी ने भी माना कि जंगलराज के मुद्दे ने उन्हें काफी नुकसान पहुंचाया. हाल के वर्षों में अपराध (हत्या, लूट, बलात्कार) फिर बढ़े हैं. “सुशासन” की इमेज को फिर से मजबूत करना होगा. पुलिस रिफॉर्म, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और अपराधियों पर सख्ती जरूरी है.
बिहार की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी और युवाओं का बड़े पैमाने पर बाहर पलायन है. चुनाव में सभी दलों ने लाखों नौकरियों का वादा किया था. नीतीश सरकार ने भी बड़े-बड़े वादे किए हैं, लेकिन पिछले 20 सालों में औद्योगिक विकास नहीं हो पाया. प्राइवेट सेक्टर में निवेश लाना, स्किल डेवलपमेंट और रोजगार मेले जैसे कदमों को तेज करना होगा. नहीं तो युवाओं में असंतोष बढ़ेगा. वहीं, मुफ्त बिजली, लखपति दीदी, गरीबों के लिए पंचामृत योजना आदि वादे पूरे करने के लिए बड़ा बजट चाहिए. केंद्र से स्पेशल पैकेज की मांग पहले से चल रही है, उसे हासिल करना और राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत रखना जरूरी है.
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