Gaurav Pandey
लिखने-पढ़ने का शौक है। राजनीति में दूर-दूर से रुचि है। अखबार की दुनिया के बाद अब डिजिटल के मैदान में हूं। आठ साल से ज्यादा समय से देश-विदेश की खबरें लिख रहा हूं। दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे संस्थानों में सेवाएं दी हैं।
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Prashant Kishor Tells Future Of Nitish Kumar : जन सुराज पदयात्रा के सूत्रधार और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर उर्फ पीके ने एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को निशाने पर लिया है। पीके ने आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर कहा कि मैंने नीतीश कुमार के बारे में 4 से 5 महीने पहले कहा था कि अगर वह महागठबंधन से चुनाव लड़ेंगे तो उनको 5 लोकसभा सीट भी नहीं मिल पाएंगी। नीतीश कुमार मेरी बात सुनने के बाद डर के मारे महागठबंधन से भाग गए। उन्हें समझ में आ गया था कि अगर प्रशांत किशोर कह रहा है तो सच में जदयू को लोकसभा की 5 सीटें भी नहीं मिलेंगी।
जन सुराज अभियान के सूत्रधार @PrashantKishor ने CM नीतीश कुमार पर तंज करते हुए कहा कि नीतीश जी पलटूराम हैं ये तो बिहार का पूरा बच्चा-बच्चा जानता है, मगर ठीक उतना ही बड़ा पलटीमार भाजपा वाले भी हैं।
पश्चिम चंपारण में #AmitShah ने चिल्लाकर कहा था कि नीतीश कुमार के लिए सारे दरवाजे… pic.twitter.com/IMb26IO0Tu— Tathya Bharat (@TathyaBharatIND) March 7, 2024
पुरानी भविष्यवाणी याद दिलाने के साथ पीके ने नीतीश के लिए एक और भविष्यवाणी भी कर दी। उन्होंने कहा कि आप लिखकर रख लीजिए कि नीतीश कुमार चाहे जिस गठबंधन का हिस्सा बनें, भाजपा के साथ लड़ें, महागठबंधन में शामिल हो जाएं या अकेले ही चुनावी मैदान में उतरें, साल 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उनके विधायकों की संख्या 20 से कम ही रहेगी। पीके ने यह भी कहा कि अगर जदयू के 20 से ज्यादा विधायक आए तो मैं बिहार की जनता से माफी मांग लूंगा। बिहान की जनता इतनी बेवकूफ नहीं है। जनता ने उन्हें राज्य का विकास करने के लिए वोट दिए थे लेकिन उन्होंने केवल पलटी मारने का काम किया।
#PrashantKishor की भविष्यवाणी “अगर विधानसभा का चुनाव २०२५ में हुआ तो जदयू को २० सीट भी नहीं आएगा”#बिहार #JDU #Election #Jansuraaj pic.twitter.com/ryJnEIx3Vb
— Madhukar Singh (Kumar) (@madhukar_singh) March 7, 2024
बता दें कि लंबे समय तक कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्षी महागठबंधन इंडिया का हिस्सा रहने के बाद नीतीश कुमार ने अचानक इससे नाता तोड़ लिया था और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा बन गए थे। नीतीश ने साल 2020 का विधानसभा चुनाव भाजपा के साथ लड़कर जीता था। इसके बाद उन्होंने लालू प्रसाद यादव की राजद से हाथ मिलाकर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली थी। इसके बाद बीती 28 जनवरी को वह फिर भाजपा के खेमे में आ गए थे। उनके इस कदम की राजद नेता तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने कड़े शब्दों में आलोचना की थी लेकिन नीतीश कुमार को इन सबसे कुछ फर्क पड़ता नहीं दिखा है।
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