---विज्ञापन---

Religion angle-right

Temples of India: जिंदा लड़की की समाधि पर बना है वाराणसी का यह मंदिर, दिल दहला देने वाला है इतिहास!

Temples of India: वाराणसी यानी काशी में एक ऐसा मंदिर है, जिसकी नींव में एक जिंदा लड़की दफन है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि मंदिर के फाउंडेशन में जीवित इंसान दफनाया गया? यह अंधविश्वास था कुछ और? आइए जानते हैं, वाराणसी में यह मंदिर कहां है, किसने बनवाया, क्या नाम है और इसका इतिहास क्या है?

---विज्ञापन---

Temples of India: वाराणसी यानी भगवान शिव की नगरी काशी की महिमा अपार है। कहते हैं, यहां जितनी गलियां नहीं हैं, उससे अधिक मंदिर हैं और इन मंदिरों से भी अधिक यहां इन मंदिरों के किस्से-कहानियां और गाथाएं हैं। यहां वरुणा और असी नदियों के बीच बसी वाराणसी के एक ऐसे मंदिर की चर्चा की गई है, जो एक जिंदा लड़की की समाधि पर बना है। आइए जानते हैं, वाराणसी में यह मंदिर कहां है, किसने बनवाया, क्या नाम है और इसका इतिहास क्या है?

सगी मां ने किया जिंदा दफन

वाराणसी के जिस मंदिर की बात यहां हो रही है, उसमें जिंदा दफन लड़की कोई आम लड़की नहीं बल्कि एक राजकुमारी थी। इसके बारे में कहा जाता है कि मंदिर की नींव में एक राजकुमारी को उसकी सगी मां ने जिंदा दफन कर समाधि पर ही मंदिर को खड़ा कर दिया। वाराणसी में यह मंदिर देवनाथ पुरा मोहल्ले में पांडेय घाट पर स्थित है। बाहर से यह एक पुरानी कोठियों जैसी ही दिखती है, लेकिन अंदर से एक बड़ी-सी हवेलीनुमा भव्य मंदिर है।

---विज्ञापन---

काशी का सिद्धपीठ तारा माता का मंदिर

इस हवेलीनुमा भव्य मंदिर को काशी का सिद्धपीठ तारा माता का मंदिर कहते हैं। इस मंदिर में यूं तो कई देवता स्थापित हैं, लेकिन यह मुख्य रूप से काशी की सिद्धपीठ तारा माता का मंदिर है। मंदिर की मूर्ति (विग्रह) मंदिर की बनावट को देखकर एक पल के लिए भी यह आभास नहीं होता है कि कि इस मंदिर की नींव में एक राजकुमारी जिंदा दफन हुई थी। सवाल उठता है कि आखिर क्यों एक मां और एक रानी को अपनी सगी और इकलौती बेटी की जिंदा समाधि बनानी पड़ी?

किसने बनवाया यह मंदिर?

यह मंदिर तंत्र विद्या की देवी मां तारा को समर्पित है। जिस प्रकार बंगाल का प्रसिद्ध तारापीठ मंदिर तंत्र साधना का बड़ा केंद्र माना जाता है। ठीक वैसे ही बनारस का यह मंदिर भी मां तारा का मंदिर है। कहते हैं कि इस मंदिर का निर्माण बंगाल के एक राज्य नाटोर की रानी भवानी ने 1752 से 1758 के बीच करवाया था।

---विज्ञापन---

Kedar Ghat Bangali Tola Varanasi Uttar Pradesh - YouTube

मंदिर में दफन राजकुमारी की कहानी

वाराणसी के पांडेय घाट पर स्थित तारा माता मंदिर की नींव में जिस राजकुमारी को जिंदा दफना दिया गया था वह नाटोर की रानी भवानी की बेटी थी। उसका नाम तारा सुंदरी थी, जो अपनी मां की इकलौती संतान थी। कहते हैं, तारा सुंदरी बेइंतेहा सुंदर थी। उनका विवाह बंगाल के खेजुरी गांव में रहने वाले रघुनाथ लाहिरी से हुआ था। लेकिन बहुत ही कम उम्र में वह विधवा हो गई। इसके बाद से वह नाटोर में अपनी मां के साथ रहती थी।

---विज्ञापन---

नाटोर की रानी भवानी की कहानी

रानी भवानी का विवाह नाटोर के राजा रमाकांत से हुई थी। कहते हैं, कभी नाटोर एक संपन्न राज्य हुआ करता था। जब राज्य पर मराठाओं का हमला हुआ तो उसमें महाराज रमाकांत मारे गये। उसके रानी ने राज्य को संभाला। इधर बेटी तारा सुंदरी भी शादी के कुछ समय बाद ही विधवा हो गई और मायके आ गयी। तब से दोनों नाटोर में रहने लगे। बता दें, नाटोर अब बांग्लादेश में स्थित है, उस समय यह अविभाजित बंगाल का हिस्सा था।

तारा सुंदरी पर आया बंगाल के नवाब का दिल

नाटोर की राजकुमारी तारा सुंदरी की बेपनाह खूबसूरती की चर्चा सुनकर बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला ने उससे शादी करने का ऐलान कर दिया। नवाब से बचने के लिए रानी भवानी बेटी तारा सुन्दरी को लेकर गंगा के रास्ते बनारस (वाराणसी) भाग आयी, लेकिन मुसीबत ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। सिराजुद्दौला बारात और अपनी सेना लेकर काशी की ओर चल पड़ा।

---विज्ञापन---

फिर एक मां ने किया दिल दहलाने वाला काम

सिराजुद्दौला के वाराणसी आने की बात जानकर तारा सुंदरी ने अपनी मां रानी भवानी से कहा कि मुझे जिंदा दफना दिया जाए लेकिन दूसरे धर्म का हाथ उसके शरीर पर न लगे। कहते हैं, कोई उपाय न देखकर नाटोर की रानी भवानी ने अपनी बेटी तारा सुंदरी को जमीन में जिंदा गाड़ दिया और उनकी समाधि पर तारा माता का मंदिर बनवाकर इसमें मां तारा का विग्रह स्थापित करवा दिया। कहते हैं, यह काम रानी भवानी ने एक ही रात में ही करवा दिया था।

---विज्ञापन---

रानी ने कर दिया सब कुछ दान

कहा जाता है कि जिंदा बेटी की समाधि बनाने के बाद रानी भवानी बनारस बहुत दिनों तक रही। काशी की पंचक्रोशी यात्रा के मार्ग में आने वाले सभी धर्मशालाएं, कुएं और तालाब रानी भवानी ने ही बनवाए थे। इतिहास कहता है कि वाराणसी दो रानियों का ऋणी है, एक रानी अहिल्याबाई और दूसरी रानी भवानी। ये दोनों ही विधवाएं थीं। काशी के सभी घाट, मंदिर, तालाब या कुंड या तो रानी अहिल्याबाई के बनवाए हुए थे या फिर रानी भवानी के। कहते हैं, समय के साथ रानी भवानी ने अपना सब कुछ दान कर दिया था।

ये भी पढ़ें: Numerology: मां लक्ष्मी इन 4 मूलांकों की तारीखों में जन्मे लोगों पर रहती हैं मेहरबान, इनमें कहीं आप भी तो नहीं!

---विज्ञापन---

ये भी पढ़ें: वफादारी की मिसाल होते हैं इन 3 राशियों के लोग, दोस्ती और प्यार में दे सकते हैं अपनी जान

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

---विज्ञापन---

First published on: Sep 12, 2024 09:11 PM

End of Article

About the Author

Shyamnandan

साल 2006 में 'सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल' मैगजीन से बतौर सब-एडीटर जर्नलिज्म की दुनिया में एंट्री करने वाले श्यामनंदन को लगभग 20 वर्षों का कार्यानुभव है। बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU) के स्टूडेंट रहे ये हमेशा से एक्सपेरिमेंटल रहे हैं। डिजिटल दुनिया में इनकी पैठ साल 2009 में मोबाइल वैस (Mobile VAS) कंटेंट से हुई। हिंदुस्तान टाइम्स (HT Media), इंडिकस एनालिटिक्स की लाइव मोबाइल (LiveMobile), इंस्टामेज जैसी कंपनियों में मोबाइल प्लेटफॉर्म के लिए काम करते-समझते और जल्द ही कई पायदान लांघते हुए प्रोडक्ट मैनेजर बने। मोबाइल प्लेटफॉर्म की समझ ने इनके एनडीटीवी (NDTV) में जाने का रास्ता आसान बनाया। इनके खाते में एनडीटीवी (NDTV) की 'आस्था' और 'जॉब अलर्ट्स' पेज लॉन्च करने का श्रेय दर्ज है। यहीं से इनकी वास्तविक ऑनलाइन जर्नलिज्म शुरू हुई। इंटरनेशनल रिलेशंस, जियो-पॉलिटिक्स, एनवायरनमेंट, साइंस टेक, एजुकेशन, हेल्थ, लाइफस्टाइल, फैशन और व्यंजन-रेसपी पर काफी लिखने के बाद ये 'धर्म और ज्योतिष' कंटेंट में रम गए। इस विषय को और गहराई से समझने और प्रस्तुत करने लिए इन्होंने भारतीय विद्या भवन (BVB), नई दिल्ली से एस्ट्रोलॉजी का कोर्स कंप्लीट किया। वर्तमान में News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे श्यामनंदन, बंसल न्यूज (भोपाल) के 'वेबसाईट हेड' भी रह चुके हैं। इनकी एक बड़ी खासियत है, रणनीति और योजना के साथ आगे बढ़ना। इनको YouTube और Facebook के लिए कंटेंट क्रिएशन और कंटेंट प्रमोशन के साथ-साथ SEO, SMO और SMM की अच्छी समझ है। जहां तक हॉबी की बात है, इनको पटकथा (Screenplay) और गजल लिखने, फिल्म देखने, खाना बनाने और पेंटिंग में विशेष रूचि है। संपर्क करें: 📧 Email: shyam.nandan@bagconvergence.in 🔗 LinkedIn: https://www.linkedin.com/in/shyamnandan-kumar/ 🐦 Twitter/X: @Shyamnandan_K

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola