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Saphala Ekadashi 2025 Date: 15 या 16 दिसंबर, सफला एकादशी कब है? जानें सही डेट, महत्व और शुभ मुहूर्त

Saphala Ekadashi 2025 Date: सफला एकादशी 2025 को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन है कि यह कब है, 15 या 16 दिसंबर? पौष मास का यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और पापों से मुक्ति, सुख-समृद्धि व रुके कामों की सफलता दिलाने वाला माना जाता है. आइए जानते हैं, इस व्रत का सही डेट, महत्व और शुभ मुहूर्त क्या हैं?

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Saphala Ekadashi 2025 Date: सफला एकादशी पौष मास के कृष्ण पक्ष में मनाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण एकादशी है. यह एकादशी मुख्य रूप से भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है. इस दिन उनकी विधिपूर्वक पूजा की जाती है और भक्त मन, वचन और कर्म की शुद्धि का प्रयास करते हैं. व्रत के दौरान ध्यान, भजन, मंत्र जाप और भगवान विष्णु का स्मरण विशेष रूप से शुभ माना जाता है. हिन्दू धर्म में सफला एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है. कहा जाता है कि यह व्रत रुके हुए कामों और बाधाओं को भी सफल बनाने में मदद करता है.

सफला एकादशी का महत्व

‘सफला’ का अर्थ सफलता देने वाली होता है, इसलिए इसे एकादशी हर कार्य में सफलता का प्रतीक मानी जाती है. यह व्रत जीवन में सफलता, सौभाग्य और पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है. इस दिन विधिपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा, उपवास (चावल वर्जित) और दान करने से सभी अटके हुए कार्य पूरे होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है. माना जाता है कि इस व्रत का महात्म्य सुनना राजसूय यज्ञ के बराबर फल देता है. सफला एकादशी रखने से व्यक्ति के सभी रुके हुए काम सफल होते हैं, जीवन में सुख-समृद्धि आती है, आध्यात्मिक उन्नति होती है और इस जीवन के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है.

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कब है सफला एकादशी 2025?

पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 14 दिसंबर की शाम 6:49 बजे शुरू होगी और 15 दिसंबर की रात 9:19 बजे तक रहेगा. उदयातिथि नियम के अनुसार, इस साल सफला एकादशी सोमवार, 15 दिसंबर 2025 को पड़ रही है. व्रत रखने वाले लोग 16 दिसंबर की सुबह 7:07 बजे से 9:11 बजे के बीच अपना व्रत पारण यानी तोड़ सकते हैं. वहीं, उसी दिन रात 11:57 बजे द्वादशी समाप्त हो जाएगी.

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सफला एकादशी 2025: शुभ मुहूर्त

सफला एकादशी 2025 की पूजा 15 दिसंबर को किसी भी समय की जा सकती है. लेकिन, विशेष प्रयोजनों और उद्देश्यों के लिए इस दिन के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

ब्रह्म मुहूर्त: 05:17 AM से 06:12 AM तक
प्रातः सन्ध्या: 05:44 AM से 07:06 AM तक
अभिजित मुहूर्त: 11:56 AM से 12:37 PM तक
विजय मुहूर्त: 02:00 PM से 02:41 PM तक
गोधूलि मुहूर्त: 05:24 PM से 05:51 PM तक
सायाह्न सन्ध्या: 05:26 PM से 06:48 PM तक
अमृत काल: 04:15 AM, दिसम्बर 16 से 06:03 AM, दिसम्बर 16 तक
निशिता मुहूर्त: 11:49 PM से 12:44 AM, दिसम्बर 16 तक

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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First published on: Dec 05, 2025 09:48 PM

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Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार पिछले 20 से अधिक वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से ज्योतिष का सांगोपांग अध्ययन किया है। वे वैदिक ज्योतिष (पाराशरीय), अंक ज्योतिष (न्यूमरोलॉजी) और सामुद्रिक शास्त्र के क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं और स्वयं एक सक्रिय ज्योतिषविद हैं। जो साल 2015 से धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं। उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके।  धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

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