Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य प्राचीन भारत के महान चिंतक और दूरदर्शी नीतिकार माने जाते हैं. उनकी नीतियाँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी हजारों वर्ष पहले थीं. चाणक्य का मानना था कि जीवन में सही मित्र का चुनाव इंसान की किस्मत बदल सकता है, जबकि गलत मित्र जीवन को संकट में डाल सकता है. इसलिए उन्होंने मित्रों की पहचान को लेकर कई महत्वपूर्ण सूत्र दिए हैं, जो आज भी हमें सही दिशा दिखाते हैं.
मीठी बातें, कड़वी नीयत
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति सामने मधुर बोलता है, लेकिन पीठ पीछे आपके काम बिगाड़ता है, वह मित्र नहीं बल्कि छिपा हुआ शत्रु होता है. ऐसे लोग समय आने पर सबसे पहले धोखा देते हैं. ये लोग मुस्कुराकर मिलते हैं, लेकिन मन में ईर्ष्या, लालच और छल रखते हैं. वास्तव में ऐसे लोग दोस्त के रूप में सबसे खतरनाक दुश्मन होते हैं।
कठिन समय में साथ छोड़ दे
जो साथी कठिन समय में गायब हो जाए, वह भरोसे लायक नहीं होता. चाणक्य कहते हैं कि सच्चा मित्र वही है जो संकट की घड़ी में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहे. जो व्यक्ति मौके देखकर संबंध निभाता है, वह भविष्य में भी हानि पहुंचा सकता है.
जो हर बात जानना चाहे
चाणक्य बताते हैं कि बहुत अधिक जिज्ञासा दिखाने वाला मित्र भी खतरे का संकेत है. जो हर छोटी-बड़ी बात पूछे और आपके राज जानने की कोशिश करे, वह कभी भी उस जानकारी का गलत उपयोग कर सकता है. इसलिए राज की बातें किसी को न बताना ही समझदारी है.
प्रगति से जलने वाला मित्र नहीं
जो मित्र आपकी सफलता से खुश न हो, वह मन से आपका भला नहीं चाहता. ऐसे लोग सामने बधाई देते हैं, लेकिन भीतर से जलते हैं. चाणक्य कहते हैं कि ऐसे व्यक्ति की संगत धीरे-धीरे नुकसानदायक साबित होती है.
गुस्से में गाली और खुशी में ताना
जो मित्र छोटी-सी बात पर अपमानित करे, मज़ाक उड़ाए या आपकी कमजोरियों को सबके सामने बताए, वह कुमित्र है. ऐसे लोग संबंधों में न सम्मान रखते हैं, न मर्यादा.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।