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Inspirational Quotes: संत रविदास जी के अनमोल विचार, जो देते हैं भक्ति, समानता और मानवता का सच्चा संदेश

Inspirational Quotes: कल रविवार 1 फरवरी, 2026 को माघ मास की पूर्णिमा है और इस पावन तिथि को संत शिरोमणि श्री रविदास जी की जयंती मनाई जाती है. आइए जानते हैं, रविदास जी के अनमोल विचार, जो भक्ति, समानता और मानवता का सच्चा संदेश देते हैं.

Author Written By: Shyamnandan Updated: Jan 31, 2026 18:17
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Inspirational Quotes: माघ पूर्णिमा की पावन तिथि केवल स्नान और दान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस महान संत की जयंती का भी स्मरण कराती है, जिन्होंने मानव समाज को मन की शुद्धता और आत्मिक समानता का मार्ग दिखाया. 1 फरवरी 2026 को माघ पूर्णिमा के दिन हम संत शिरोमणि रविदास जी की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाने जा रहे हैं.

संत रविदास जी कबीर के समकालीन थे और वे भी काशी के ही रहने वाले थे. उनके विचार केवल शब्दों का संकलन नहीं हैं, बल्कि वे भक्ति, सामाजिक समरसता और निस्वार्थ मानवता का जीवंत दर्शन हैं, जो सदियों बाद भी उतने ही प्रासंगिक और प्रेरणादायक हैं. उनके सरल किंतु गूढ़ दोहे हमें यह संदेश देते हैं कि ईश्वर की सच्ची आराधना जाति-पाति या बाहरी आडंबर में नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और सद्भाव में निहित है.

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आज के तनाव और अस्थिरता से भरे जीवन में संत रविदास जी के विचार हमें आत्मिक शांति, मानवीय मूल्यों और सच्चे सुख का मार्ग दिखाते हैं. आइए, इस पावन अवसर पर उनके चुनिंदा अनमोल विचारों और दोहों से प्रेरणा लें और अपने जीवन को प्रेम और समानता के भाव से प्रकाशित करें.

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संत रविदास जी के अनमोल विचार

1- कर्म करते रहना ही मनुष्य का सच्चा कर्तव्य है, परिणाम अपने आप सौभाग्य बनकर सामने आता है.
2- यदि भलाई करना संभव न हो, तो इतना ध्यान रखें कि किसी का अहित न हो.
3- सुस्ती जीवन की सबसे बड़ी बाधा है, जबकि मेहनत सबसे भरोसेमंद साथी.
4- इंसान की पहचान उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके आचरण और कर्मों से होती है.
5- मेरा स्वप्न उस समाज का है जहां हर व्यक्ति को भोजन मिले और सभी समान व संतुष्ट हों.
6- जहां प्रेम का अभाव है, वहां पीड़ा है; और जहां प्रेम है, वहीं स्वर्ग का अनुभव होता है.
7- सभी पंथ एक ही सत्य की दिशा में ले जाते हैं और हर मानव समान आदर का पात्र है.
8- पूजा, साधना और भक्ति सब मन से ही होती है—शुद्ध मन में ही परमात्मा का वास है.
9- यदि अंतःकरण पवित्र हो, तो साधारण स्थान भी तीर्थ के समान पावन हो जाता है.
10- प्रेम ही जीवन का सार है और वही ईश्वर का वास्तविक स्वरूप है.
11- माता, पिता और गुरु का सम्मान देवताओं के समान करना चाहिए.
12- यदि तुम पुष्प नहीं बन सकते, तो किसी के मार्ग में पीड़ा मत बिखेरो.
13- जिस व्यक्ति का मन निर्मल होता है, उसके लिए पवित्रता किसी विशेष स्थान की मोहताज नहीं रहती.
14- फूल बनना संभव न हो तो भी दूसरों को चुभने वाला कांटा मत बनो.
15- ईश्वर उन्हीं हृदयों में निवास करते हैं जो ईर्ष्या, लोभ और अहंकार से मुक्त होते हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Jan 31, 2026 06:17 PM

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