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प्रेमानंद महाराज ने बताया इस 1 गलती को महापाप, देवी-देवता भी नहीं करते माफ

Premanand Ji Maharaj Pravachan: प्रसिद्ध संत और आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज अपने प्रवचन के माध्यम से भक्तों को जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में बताते हैं और उनका मार्गदर्शन करते हैं. हाल ही में उन्होंने एक ऐसी गलती के बारे में बताया है, जिसे महापाप माना गया है. चलिए जानते हैं वो एक कौन-सी गलती है और क्यों उसे माफ नहीं किया जाता है.

Author Written By: Nidhi Jain Updated: Jan 18, 2026 07:44
Premanand Ji Maharaj Pravachan
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Premanand Ji Maharaj Pravachan: अक्सर आपने लोगों को कहते हुए सुना होगा कि इंसान गलतियों का पुतला है. जब व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ता है तो उससे तमाम गलतियां होती हैं. लेकिन जो व्यक्ति उन गलतियों से सबक लेता है और भविष्य में उन्हें दोहराता नहीं है, उसे ही सच्चा इंसान कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, वैसे तो देवी-देवता प्रायश्चित करने पर व्यक्ति की सभी गलतियों को माफ कर देते हैं, परंतु एक गलती ऐसी भी है जिसे शास्त्रों में महापाप बताया गया है.

चलिए राधा रानी और कृष्ण जी की सेवा-भक्ति में लीन वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक प्रेमानंद महाराज से व्यक्ति की उस एक गलती के बारे में जानते हैं, जिसे शास्त्रों में महापाप माना गया है और जिसे भगवान भी कभी माफ नहीं करते हैं.

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किस गलती की नहीं मिलती माफी?

एक भक्त ने प्रसिद्ध संत और आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज से सवाल किया ‘क्या कोई ऐसे पाप भी है, जिसे भगवान माफ नहीं करते हैं?’ इस सवाल का जवाब देते हुए कथावाचक ने कहा ‘एक है. पूरी सृष्टि में केवल एक ही ऐसा पाप है और वो है भगवान के भक्त का द्रोह. ये एक ऐसा पाप है, जिसे भगवान माफ नहीं करते हैं.’

द्रोह क्या होता है?

द्रोह को एक नकारात्मक भावना व कार्य माना जाता है, जो जानबूझकर किसी को दुख देने के लिए किया जाता है. ये किसी व्यक्ति के प्रति बुरी नीयत, व्यवहार व दुश्मनी को दर्शाता है. हालांकि, कुछ बातों पर ध्यान देकर द्रोह के पाप से बचा जा सकता है.

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ये भी पढ़ें- सोते हुए नाम जाप कैसे करें? प्रेमानंद महाराज ने बताया तरीका

द्रोह के पाप से कैसे बचें?

यदि आपके मन में किसी व्यक्ति के प्रति द्रोह की भावना है तो उसके कारण के बारे में विचार करें. यदि कारण बड़ा नहीं है तो सामने वाले व्यक्ति को तुरंत माफ कर दें. यदि वजह कोई बहुत बड़ी है तो अपने मन को समझाएं कि इससे सामने वाले व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं हो रहा है, बल्कि आपको ही पाप लग रहा है. ऐसे में आप कभी भी पाप बंधन से मुक्त नहीं हो पाएंगे. इसलिए मन को शांत रखें और समाधान व बातचीत का रास्ता चुनें.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.


First published on: Jan 18, 2026 07:44 AM

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