Premanand Ji Maharaj Mathe Par Kya lagte Hai: भारत में प्राचीन काल से ही ऋषियों-मुनियों, आध्यात्मिक मार्गदर्शकों व गुरुओं की समृद्ध परंपरा चली आ रही है, जो योग, ध्यान और देवी-देवताओं के उपदेशों को भक्ति के माध्यम से लोगों तक पहुंचाते हैं. इस समय इस परंपरा को आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज आगे बढ़ा रहे हैं. उनकी पहचान केवल एक संत के रूप में ही नहीं है, बल्कि युवा पीढ़ी को आध्यात्म से जोड़ने वाले प्रभावशाली गुरु के रूप में भी है.
प्रेमानंद महाराज अपनी सरल भाषा में भक्ति और राधा रानी के प्रेमपूर्ण उपदेशों के प्रचार-प्रसार के लिए जाने जाते हैं, जो केवल पीले रंग के कपड़े ही धारण करते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि प्रेमानंद महाराज अपने माथे पर क्या लगाते हैं और उसका धार्मिक महत्व क्या है? यदि नहीं, तो चलिए इस बारे में जानते हैं.
प्रेमानंद महाराज माथे पर क्या लगाते हैं? (What does Premanand Ji Maharaj apply to his forehead?)
एकांतिक वार्तालाप के दौरान एक बार प्रेमानंद महाराज ने खुद बताया था कि वो अपने माथे के ऊपरी हिस्से पर श्री जी का प्रसादी चंदन (पीला) लगाते हैं, जबकि आंखों के पास वृंदावन की रज यानी मिट्टी धारण करते हैं. प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि ये मेरा सौभाग्य है कि मैं श्री जी का प्रसादी चंदन धारण करता हूं. ये चंदन जुगल किशोर की उपासना का सुहाग है, जिसे मैं 24 घंटे धारण करता हूं.
इसी के आगे प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि चंदन दिखावे के लिए नहीं लगाया जाता है, बल्कि ये आध्यात्मिक श्रृंगार का एक अहम हिस्सा है. चंदन (तिलक) को व्यक्ति की भक्ति, भावना और आराधना का प्रतीक माना जाता है.
ये भी पढ़ें- मुंह से नाम जाप कर रहे हैं लेकिन मन कहीं और ही है तो क्या इस जप से लाभ होगा? जानें प्रेमानंद महाराज से
माथे पर प्रसादी चंदन लगाने का महत्व और लाभ
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माथे पर प्रसादी चंदन यानी पीला चंदन लगाने से मन शांत रहता है. साथ ही व्यक्ति के आसपास सकारात्मक ऊर्जा रहती है, जिस कारण उसे घबराहट और बेचैनी की समस्या नहीं होती है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Premanand Ji Maharaj Mathe Par Kya lagte Hai: भारत में प्राचीन काल से ही ऋषियों-मुनियों, आध्यात्मिक मार्गदर्शकों व गुरुओं की समृद्ध परंपरा चली आ रही है, जो योग, ध्यान और देवी-देवताओं के उपदेशों को भक्ति के माध्यम से लोगों तक पहुंचाते हैं. इस समय इस परंपरा को आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज आगे बढ़ा रहे हैं. उनकी पहचान केवल एक संत के रूप में ही नहीं है, बल्कि युवा पीढ़ी को आध्यात्म से जोड़ने वाले प्रभावशाली गुरु के रूप में भी है.
प्रेमानंद महाराज अपनी सरल भाषा में भक्ति और राधा रानी के प्रेमपूर्ण उपदेशों के प्रचार-प्रसार के लिए जाने जाते हैं, जो केवल पीले रंग के कपड़े ही धारण करते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि प्रेमानंद महाराज अपने माथे पर क्या लगाते हैं और उसका धार्मिक महत्व क्या है? यदि नहीं, तो चलिए इस बारे में जानते हैं.
प्रेमानंद महाराज माथे पर क्या लगाते हैं? (What does Premanand Ji Maharaj apply to his forehead?)
एकांतिक वार्तालाप के दौरान एक बार प्रेमानंद महाराज ने खुद बताया था कि वो अपने माथे के ऊपरी हिस्से पर श्री जी का प्रसादी चंदन (पीला) लगाते हैं, जबकि आंखों के पास वृंदावन की रज यानी मिट्टी धारण करते हैं. प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि ये मेरा सौभाग्य है कि मैं श्री जी का प्रसादी चंदन धारण करता हूं. ये चंदन जुगल किशोर की उपासना का सुहाग है, जिसे मैं 24 घंटे धारण करता हूं.
इसी के आगे प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि चंदन दिखावे के लिए नहीं लगाया जाता है, बल्कि ये आध्यात्मिक श्रृंगार का एक अहम हिस्सा है. चंदन (तिलक) को व्यक्ति की भक्ति, भावना और आराधना का प्रतीक माना जाता है.
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माथे पर प्रसादी चंदन लगाने का महत्व और लाभ
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माथे पर प्रसादी चंदन यानी पीला चंदन लगाने से मन शांत रहता है. साथ ही व्यक्ति के आसपास सकारात्मक ऊर्जा रहती है, जिस कारण उसे घबराहट और बेचैनी की समस्या नहीं होती है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.