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Panchdhanya Paatra: इन 5 अनाज के कलश से बनाएं ‘मनी मैग्नेट पॉट’, आपके हाथ में होगी अपनी किस्मत की डोर

Panchdhanya Paatra: मनी मैग्नेट पॉट एक पारंपरिक उपाय है, जिसमें रसोई के 5 अनाज से धन और स्थिरता को आकर्षित करने की मान्यता है. आइए जानते हैं, इसे बनाने की विधि, रखने का सही स्थान और इसके लाभ क्या हैं.

Author Written By: Shyamnandan Updated: Jan 9, 2026 21:11
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Panchdhanya Paatra: भारतीय परंपरा में अनाज को केवल भोजन नही, बल्कि समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक माना गया है. रसोई को घर का ऊर्जा केंद्र कहा जाता है. यहीं से परिवार के स्वास्थ्य और आर्थिक संतुलन की दिशा तय होती है. इसी सोच से जुडा एक प्राचीन उपाय है पंचधान्य पात्र, जिसे आज के समय में मनी मैग्नेट पॉट भी कहा जाता है. आइए जानते हैं, मनी मैग्नेट पॉट कैसे बनाया जाता है और इससे क्या-क्या लाभ हैं?

पंचधान्य पात्र क्या है?

पंचधान्य का अर्थ है पांच प्रकार के अनाज. जब इन अनाजों को विधि अनुसार एक पात्र में रखा जाता है, तो इसे धन और स्थिरता को आकर्षित करने वाला माध्यम माना जाता है. यह उपाय आस्था, परंपरा और सकारात्मक सोच पर आधारित है.

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पांच अनाज और उनका महत्व

इस पात्र में आमतौर पर घर में उपलब्ध अनाज ही रखे जाते हैं. ये अनाज हैं: चावल, गेहूं, हरी मूंग, पीली सरसों और काला तिल या उड़द. ये पांचों अनाज मिलकर जीवन के अलग अलग पक्षों को संतुलित करने का प्रतीक बनते हैं.

चावल: चावल को शांति और भावनात्मक संतुलन का प्रतीक माना जाता है.
गेहूं: गेहूं परिश्रम, सम्मान और निरंतर प्रगति से जुडा है.
हरी मूंग: हरी मूंग दाल को बुद्धि, समझ और व्यापारिक लाभ से जोडा जाता है.
पीली सरसों: पीली सरसों या चना दाल भाग्य, विस्तार और अवसरों का संकेत मानी जाती है.
काला तिल: काले तिल या उड़दस्थायित्व और सुरक्षा का भाव देते हैं.

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मनी मैग्नेट पॉट बनाने की विधि

इसके लिए मिट्टी या पीतल का पात्र सबसे अच्छा माना जाता है. मिट्टी पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करती है, जो स्थिरता और टिकाव का भाव देती है. पात्र को साफ कर उसमें सभी पांच अनाज समान मात्रा में भरें. इसके ऊपर पांच सिक्के रखें. सिक्के किसी भी चलन के हो सकते हैं. अब पात्र के मुख को लाल कपडे से ढककर हल्के धागे से बांध दें. लाल रंग ऊर्जा और सक्रियता का संकेत माना जाता है.

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स्थापना का सही तरीका

सुबह का समय इस उपाय के लिए उपयुक्त माना जाता है. पात्र तैयार होने के बाद उसे कुछ समय के लिए पूजा स्थान में रखें. मन में समृद्धि की कामना करें. शब्द कम रखें, भावना स्पष्ट होनी चाहिए.

कहां रखें यह पात्र?

पूजा के बाद इस पात्र को तिजोरी, अलमारी या उस स्थान पर रखें जहां धन से जुडी वस्तुएं रखी जाती हैं. इसे जमीन पर सीधे न रखें. साफ और शांत जगह चुनें.

इससे मिलने वाले लाभ

यह उपाय घर में सकारात्मक वातावरण बनाने में सहायक माना जाता है. खर्च और आय के बीच संतुलन की भावना बढती है. बचत के प्रति सजगता आती है. रसोई में अनाज का सम्मान बना रहता है, जिससे संतोष और स्थिरता का भाव बढता है.

जरूरी सावधानियां

पात्र और आसपास सफाई रखें. हर तीन या चार महीने में पुराने अनाज को पक्षियों को खिला दें और नए अनाज भरें. यह उपाय विश्वास और नियमितता से जुडा है, जल्दबाजी से नही. यह परंपरागत उपाय आधुनिक जीवन में भी सरलता से अपनाया जा सकता है

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है।News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

First published on: Jan 09, 2026 09:11 PM

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