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मासिक कृष्ण जन्माष्टमी कब? भगवान कृष्ण को करें इन मंत्रों से प्रसन्न, मिलेगा शुभ फल

Masik Krishna Janmashtami 2024: मासिक कृष्ण जन्माष्टमी हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन विधि-विधान से कान्हा की पूजा की जाती है। आज इस खबर में जानेंगे कि फाल्गुन माह की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी की तिथि कब है। साथ ही पूजा विधि क्या है।

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Masik Krishna Janmashtami 2024: सनातन धर्म में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का बहुत ही ज्यादा महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 3 मार्च 2024 दिन रविवार को है। मासिक जन्माष्टमी की तिथि भगवान कृष्ण को समर्पित है। इस दिन भक्त भगवान श्री कृष्ण की पूजा विधि-विधान और पूरे मन में भक्ति भाव से करते हैं। मान्यता है कि जो भक्त विधि-विधान से पूजा अर्चना करते हैं उनकी सारी मनोकामना पूर्ण होती है। पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है।

क्या है मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

प्रत्येक माह में आने वाली मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भक्तों के लिए बेहद ही खास माना गया है। मान्यता है कि इस दिन कान्हा की विधि-विधान से पूजा करने से सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है। साथ ही आर्थिक समस्याएं भी दूर होने लगती हैं। ज्योतिषियों की मान्यता है कि इस दिन उपवास रखने से सभी पापों से छुटकारा मिल जाती है। साथ ही सभी मनोकामना भी पूर्ण होती है।

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी की क्या है पूजा विधि

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भक्त सुबह उठें और सबसे पहले स्नान करें। उसके बाद अपने घर के मंदिर की अच्छे से साफ-सफाई करें। उसके बाद पीले रंग के वस्त्र पहने और एक लकड़ी की चौकी पर भगवान कृष्ण की मूर्ति स्थापित करें। मूर्ति स्थापित करने के बाद भगवान कृष्ण को पंचामृत से स्नान करें और गोपी चंदन से तिलक लगाएं। तिलक लगाने के बाद माखन-मिश्री का भोग लगाएं। उसके बाद भगवान श्री कृष्ण के मंत्रों का जाप भी करें। अंत में भगवान श्री कृष्ण की आरती करें और पूजा में किसी भी प्रकार की हुई गलती के लिए क्षमा-प्रार्थना करें।

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जन्माष्टमी के दिन करें भगवान कृष्ण को इन मंत्रों से प्रसन्न

“हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे”
“हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे”

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।
प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नम:

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यथोपलब्धपूजनसामग्रीभिः कार्य सिद्धयर्थं कलशाधिष्ठित देवता सहित, श्रीजन्माष्टमी पूजनं महं करिष्ये।

अनादिमाद्यं पुरुषोत्तमोत्तमं श्रीकृष्णचन्द्रं निजभक्तवत्सलम्।

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स्वयं त्वसंख्याण्डपतिं परात्परं राधापतिं त्वां शरणं व्रजाम्यहम्।।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।

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