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Religion

Makar Sankranti 2026: इस बार मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाना बन सकती है परेशानी की वजह, जानिए शास्त्रीय कारण

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति को उत्तर भारत में खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन खिचड़ी जरूर खाई जाती है. लेकिन पंडितों के अनुसार, साल 2026 में इस बार मकर संक्रांति खिचड़ी खाने से जीवन में परेशानियां आ सकती हैं. आइए जानते हैं, ऐसा क्यों कहा जा रहा है और इसका धार्मिक और शास्त्रीय कारण क्या है?

Author Written By: Shyamnandan Updated: Jan 8, 2026 22:12
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Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति भारत के प्रमुख पर्वो में गिनी जाती है. यह पर्व हर वर्ष 14 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाता है. इस दिन दान, स्नान और पुण्य कर्म का विशेष महत्व बताया गया है. उत्तर भारत में यह पर्व खिचड़ी के नाम से भी प्रसिद्ध है. परंतु वर्ष 2026 में मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने से पहले सावधानी जरूरी मानी जा रही है. आइए जानते हैं, किस शास्त्रीय कारण से ऐसा कहा जा रहा है कि इस बार मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाना बन परेशानी की वजह सकती है?

मकर संक्रांति और खिचड़ी की परंपरा

मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने की परंपरा बहुत पुरानी है. दाल, चावल और मौसमी सब्जी से बनी खिचड़ी को पौष्टिक आहार माना जाता है. ठंड के मौसम में यह शरीर को ऊर्जा देती है. इसी कारण इसे पर्व के भोजन से जोड़ा गया है. उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्र में यह परंपरा खास रूप से निभाई जाती है.

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दान का विशेष महत्व

इस दिन खिचड़ी का दान भी शुभ माना जाता है. कच्चे चावल और दाल का दान करने से पुण्य फल मिलने की मान्यता है. कुछ लोग पकी हुई खिचड़ी भी जरूरतमंद लोगो को देते है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दान जीवन में सुख और शांति लाता है.

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इस बार क्यों बदल गया नियम?

वर्ष 2026 में मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी का संयोग बन रहा है. एकादशी तिथि का अपना अलग धार्मिक महत्व है. शास्त्रों में बताया गया है कि एकादशी के दिन चावल से बने भोजन का सेवन वर्जित माना जाता है. इसी कारण खिचड़ी खाने से बचने की सलाह दी जा रही है.

एकादशी पर चावल से परहेज

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चावल में जल तत्व अधिक होता है. इससे मन की स्थिरता प्रभावित हो सकती है. एकादशी व्रत का उद्देश्य मन और शरीर को संयम में रखना बताया गया है. इस दिन हल्का और सात्विक भोजन करने की परंपरा अपनाई जाती है.

खिचड़ी के स्थान पर क्या करें

जो लोग परंपरा निभाना चाहते है, वे खिचड़ी का दान कर सकते है लेकिन स्वयं सेवन न करे. इसके अलावा तिल, गुड़, मूंगफली और फल का उपयोग शुभ माना जाता है. व्रत अनुसार भोजन करने से पर्व और तिथि दोनो का सम्मान बना रहता है.

ज्योतिषाचार्य हर्षवर्द्धन शांडिल्य बताते हैं कि मकर संक्रांति उत्सव और आस्था का पर्व है. साथ ही शास्त्रीय नियमो का पालन भी आवश्यक माना गया है. इस वर्ष परंपरा को समझदारी के साथ निभाना अधिक उचित बताया जा रहा है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है।News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

First published on: Jan 08, 2026 10:12 PM

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