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Religion

58 दिन तक बाणों की शैय्या पर लेटे रहे भीष्म पितामह, जानें उत्तरायण पर ही क्यों त्यागे प्राण?

Bhishma Pitamah Death Mystery: भीष्म पितामह ने कुल 58 दिन तक बाणों की शैय्या पर लेटे रहने के बाद उत्तरायण के दिन अपने प्राण त्यादगे थे. लेकिन क्या आपको पता है कि भीष्म पितामह ने क्यों इस दिन को ही अपने प्राण त्यागने के लिए चुना? यदि नहीं, तो चलिए जानते हैं भीष्म पितामह की मृत्यु से जुड़ी दिलचस्प बातों के बारे में.

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Written By: Nidhi Jain Updated: Jan 9, 2026 10:39
Bhishma Pitamah Death Mystery
Credit- AI Gemini

Bhishma Pitamah Death Mystery: भीष्म पितामह को महाभारत का एक प्रमुख पात्र माना जाता है, जो कि राजा शांतनु और देवी गंगा के पुत्र थे. भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था यानी वो जब चाहें अपने प्राण को त्याग सकते थे. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागने के लिए उत्तरायण का दिन चुना था. हालांकि, इससे पहले वो कुल 58 दिन तक बाणों की शैय्या (तीरों के बिस्तर) पर रहे थे.

क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है कि भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागने के लिए उत्तरायण का दिन ही क्यों चुना था? क्या भीष्म पितामह और उत्तरायण के दिन का कोई खास कनेक्शन है? अगर हां, तो चलिए जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब.

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भीष्म पितामह ने क्यों उत्तरायण पर त्यागे प्राण?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भीष्म पितामह के उत्तरायण के दिन प्राण त्यागने के पीछे दो मुख्य कारण हैं.

पहला कारण-

धार्मिक मान्यता के अनुसार, उत्तरायण के दिन जो भी व्यक्ति अपने प्राण त्यागता है, उसका पुनर्जन्म नहीं होता है. बल्कि आत्मा को मोक्ष मिलता है और व्यक्ति कर्म बंधन से मुक्त हो जाता है. ये भी एक कारण है कि भीष्म पितामह ने उत्तरायण के दिन अपने प्राण त्यागे थे.

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बता दें कि उत्तरायण वह अवधि है, जब सूर्य मकर राशि से निकलकर कर्क राशि में उत्तर दिशा की ओर चलता है. उत्तर भारत में उत्तरायण के दिन ही मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है.

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दूसरा कारण-

कहा जाता है कि महाभारत युद्ध के दसवें दिन अर्जुन ने भीष्म पितामह को घायल किया था. इस दिन सूर्य दक्षिणायन में था, जिसे उत्तरायण होने में कुल 58 दिन बचे थे. ऐसे में कुल 58 दिन तक भीष्म पितामह बाणों की शय्या यानी तीरों के बिस्तर पर लेटे रहे थे.

हालांकि, इस दौरान भीष्म पितामह ने पांडवों को धर्म, राजधर्म, नीति और जीवन के अनेक नैतिक सिद्धांतों का ज्ञान दिया था ताकि वो एक अच्छे शासक बनें और हस्तिनापुर का भविष्य सुरक्षित हाथों में रहे.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Jan 09, 2026 10:39 AM

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