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Religion

Lohri 2026: कौन थे दुल्ला भट्टी? इनकी कहानी के बिना अधूरा है लोहड़ी का पर्व, जानिए पूरा किस्सा

Lohri 2026: लोहड़ी के पर्व पर लोक गीत गाए जाते हैं जिसमें दुल्ला भट्टी का नाम आता है. लोहड़ी पर दुल्ला भट्टी की कहानी भी सुनाई जाती है. इसके बिना लोहड़ी का पर्व अधूरा माना जाता है. लोहड़ी पर यह कहानी क्यों सुनाई जाती है और दुल्ला भट्टी कौन थे चलिए जानते हैं?

Author Edited By : Aman Maheshwari
Updated: Jan 13, 2026 10:37
Lohri 2026
Photo Credit- News24GFX

Lohri 2026: लोहड़ी के पर्व पर लोग अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करते हैं. परिक्रमा करते हुए आग में तिल, गुड़, गजक, मूंगफली अर्पित करते हैं. इसके साथ ही कई गीत गाते हैं. ऐसे ही एक गीत के बोल ‘सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन विचारा हो… दुल्ला भट्टी वाला हो…’ हैं. इस गीत में दुल्ला भट्टी का जिक्र मिलता है. लोहड़ी का पर्व इस गीत और दुल्ला भट्टी की कहानी के बिना अधूरा माना जाता है. लोहड़ी पर दुल्ला भट्टी का जिक्र क्यों होता है और दुल्ला भट्टी कौन थे? चलिए जानते हैं.

कौन थे दुल्ला भट्टी?

पंजाब के लोग दुल्ला भट्टी को लोकनायक, विद्रोही योद्धा और गरीबों का रक्षक मानते हैं. वह मुगल सत्ता के खिलाफ सीना तानकर खड़े हुए थे. दुल्ला भट्टी का जन्म 16वीं शताब्दी (साल 1547) में पंजाब के सांडल बार क्षेत्र में हुआ था. जो वर्तमान समय में पाकिस्तान का फैसलाबाद है. वह राजपूत वंश से थे उनके पिता और दादा ने मुगलों की नीतियों का विरोध किया था जिसके कारण उन्हें सजा हुई थी. ऐसी पारिवारिक पृष्ठभूमि होने के कारण दुल्ला भट्टी के अंदर विद्रोह की भावना को जन्म हुआ. दुल्ला भट्टी को स्त्रियों के सम्मान का रक्षक माना जाता है.

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दुल्ला भट्टी की कहानी

लोहड़ी के पर्व पर दुल्ला भट्टी की कहानी को सुना जाता है. मुगल काल में अकबर के शासन में संदल बार में लड़कियों को अमीर सौदागरों को बेचा जाता था. उस समय दुल्ला भट्टी ने लड़कियों की रक्षा की थी. दुल्ला भट्टी ने सौदागरों से लड़कियों को छुड़ाया था और उनकी शादी कराई थी. तभी से दुल्ला भट्टी को नायक के रूप में माना जाने लगा. दुल्ला भट्टी लोगों को महिलाओं की हिफाजल करना सिखाते हैं. उनसे गलत के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा मिलती है.

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एक बार दुल्ला भट्टी को सुंदरदास नाम के किसान की दो बेटियों सुंदरी-मुंदरी के जबरदस्ती विवाह की खबर मिली थी. तब दुल्ला भट्टी ने गांव में आग लगा दी और शादी रोक दी. इसके बाद लड़कियों के माता-पिता के मुताबिक उनकी शादी हुई. लोहड़ी पर्व पर दुल्ला भट्टी की यह कहानी सुनाई जाती है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Jan 13, 2026 10:36 AM

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