---विज्ञापन---

Religion

Holi Customs: बड़कुला क्या है, क्यों बनाया जाता है? जानें होलिका दहन से जुड़ी इस परंपरा का महत्व

Holi Customs: बड़कुला या बड़कुल्ला के माध्यम से होली का त्योहार न केवल रंगों और खुशियों का उत्सव बनता है, बल्कि हमारी प्राचीन संस्कृति और आध्यात्मिक रीति-रिवाज की भी पहचान बनता है. इस सरल परंपरा में समाज, परिवार और भक्ति की गहरी समझ छुपी है. आइए जानते हैं, बड़कुला क्या है और होलिका दहन से जुड़ी इस परंपरा का महत्व क्या है?

Author Written By: Shyamnandan Updated: Feb 25, 2026 13:12
BADKULLA

Holi Customs: होली का त्योहार सिर्फ रंगों और खुशियों का प्रतीक नहीं है, बल्कि इसमें प्राचीन रीति-रिवाज और आध्यात्मिक मान्यताएँ भी जुड़ी हैं. उत्तर भारत में होली से जुड़ा एक खास और कम जाना़ वाला परंपरागत तत्व है बड़कुला या बड़कुल्ला. यह न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि होलिका दहन की रस्म को और भी विशेष बनाता है. आइए जानते हैं, बड़कुला क्या है, क्यों बनाया जाता है और होलिका दहन से जुड़ी परंपरा का महत्व क्या है?

बड़कुला क्या है?

बड़कुला छोटे-छोटे गोबर की टिकियों या आकृतियों को कहते हैं. इन्हें विभिन्न आकारों में बनाया जाता है जैसे गोल टिकिया, सूरज, चाँद, ढाल और नारियल. हर आकृति के बीच में छोटा सा छेद होता है. यह छेद सूखने के बाद इन्हें रस्सी में पिरोने के काम आता है. इनका मुख्य उद्देश्य होलिका दहन के समय अग्नि में अर्पित करना है.

---विज्ञापन---

क्षेत्रीय नाम

अलग-अलग क्षेत्रों में बड़कुला को विभिन्न नामों से पुकारा जाता है। राजस्थान और मालवा में इसे आमतौर पर ‘भरभोलिया’ कहा जाता है, जबकि हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में इसे बड़कुला, गुलरिया या बरूले के नाम से भी जाना जाता है।

बनावट और तैयारी

बड़कुला बनाने की शुरुआत आमतौर पर फुलेरा दूज से होती है. लोग गाय के शुद्ध गोबर को अच्छे से गूंथकर टिकिया या आकृतियाँ तैयार करते हैं. फिर इन आकृतियों को धूप में 3-5 दिनों तक सुखाया जाता है. पूरी तरह सूखने के बाद इन्हें माला के रूप में पिरोया जाता है. एक माला में अक्सर 11, 21 या 51 बड़कुले होते हैं, जिनके साथ ढाल भी शामिल होती है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: Shiani Rashi Parivartan: मीन से मेष में गोचर कर नीच के हो जाएंगे शनि, ढाई साल तक इन राशियों का हाल रहेगा बेहाल

बड़कुला का धार्मिक महत्व

बड़कुला होलिका दहन की अग्नि में डालना बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. ऐसा माना जाता है कि इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. गाय के गोबर से बने बड़कुला को पवित्र माना जाता है, इसलिए इनको अग्नि में अर्पित करने से घर और आसपास का वातावरण शुद्ध होता है. कई परिवारों में इसे होलिका माता के ‘दहेज’ के रूप में भी देखा जाता है. इससे सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है.

बड़कुला पूजन और रस्में

होलिका दहन के दिन महिलाएं बड़कुला की माला लेकर पूजा करती हैं. इसमें जल, रोली, चावल और फूलों के साथ बड़कुला को अग्नि में अर्पित किया जाता है. हर परिवार के सदस्य के नाम की माला डालने से माना जाता है कि साल भर के कष्ट और बीमारियां दूर होती हैं.

सामाजिक-सांस्कृतिक पहलू

बड़कुला केवल धार्मिक वस्तु नहीं है, बल्कि यह समाज और संस्कृति से जुड़ी एक परंपरा भी है. यह बच्चों और युवाओं को परंपराओं से जोड़ता है. कई गांवों में लोग मिलकर बड़कुला बनाते हैं, जिससे सामूहिक उत्सव का भाव और भी मजबूत होता है.

यह भी पढ़ें: Amalaki Ekadashi 2026: आमलकी एकादशी पर क्यों करते हैं आंवले की पूजा, जानें महत्व और प्राप्त होने वाले लाभ

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Feb 25, 2026 01:12 PM

संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.