Ganesh Chaturthi 2024: गणेश उत्सव के 10 दिनों का सनातन धर्म के लोगों के लिए विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भाद्र मास में आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन भगवान गणेश के जन्म का उत्सव गणेश चतुर्थी के तौर पर मनाया जाता है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल गणेश चतुर्थी का त्योहार 7 सितंबर को मनाया जाएगा, जिसका समापन 17 सितंबर को अनंत चतुर्थी के दिन होगा। 7 सितंबर को बप्पा की आराधना करने का शुभ मुहूर्त सुबह 11:03 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 33 मिनट तक है। इस दौरान भगवान की उपासना करने के साथ-साथ उन्हें उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाने से साधक को अपनी सभी परेशानियों से छुटकारा मिल सकता है। आइए जानते हैं उन खास पांच चीजों के बारे में, जिनका भोग भगवान गणेश को लगाना अति शुभ माना जाता है।
मालपुआ
गणेश जी को मालपुआ अति प्रिय है। इसलिए गणेश चतुर्थी के दौरान बप्पा को मालपुआ का भोग जरूर लगाना चाहिए। खासतौर पर मूर्ति स्थापना के दिन भगवान गणेश को मालपुआ का भोग लगाना शुभ होता है। इससे जीवन में आ रही परेशानियां कम होने लगती हैं।
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श्रीखंड
दही और चीनी से बनाए जाने वाला केसरिया श्रीखंड भगवान गणेश को बेहद पसंद है। माना जाता है कि जो लोग अपने हाथ से केसरिया श्रीखंड को बनाकर उसका भोग बप्पा को लगाते हैं, उनके घर में सदा खुशहाली बनी रहती है।
खसखस का हलवा
देश के कई राज्यों में भगवान गणेश को खसखस से बने हलवे का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब तक गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा को खसखस से बने हलवे का भोग नहीं लगाया जाता है, तब तक उनकी पूजा को पूरा नहीं माना जाता है।
खजूर के लड्डू
भगवान गणेश की पूजा खजूर के लड्डू के बिना अधूरी मानी जाती है। ये उनकी प्रिय मिठाई है, जिसका भोग लगाने से बप्पा बेहद प्रसन्न होते हैं।
पूरन पोली
कहा जाता है कि भगवान गणेश को पूरन पोली अति प्रिय है। इसलिए हर साल गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा को पूरन पोली का भोग लगाया जाता है। ये एक तरह का मीठा पराठा होता है, जो खाने में बेहद स्वादिष्ट लगता है।
भगवान गणेश की पूजा विधि
- गणेश चतुर्थी के दिन प्रात: काल उठें। स्नान आदि कार्य करने के बाद शुद्ध वस्त्र धारण करें।
- घर के मंदिर में एक चौकी रखें। उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं।
- चौकी के ऊपर गणेश जी की प्रतिमा को स्थापित करें।
- बप्पा को सिंदूर, मिठाई, फूल और फल का भोग लगाएं। इस दौरान गणेश जी के मंत्रों का जाप करें।
- गणेश चतुर्थी की कथा और गणेश चालीसा का पाठ करें।
- अंत में आरती करके पूजा का समापन करें।
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।