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Chanakya Niti: इन 5 लोगों के बीच जाने से होती है खुद की ही बेइज्जती, दूर रहने में है समझदारी

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य कहते हैं कि कुछ लोगों और परिस्थितियों में बीच में आने से आपकी इज्जत खुद प्रभावित हो सकती है. क्या आप जानते हैं कौन-से 5 ऐसे मामले हैं जहां हस्तक्षेप करना समझदारी नहीं होती है? आइए जानते हैं, जीवन में कैसे बचकर रहें और सम्मान बनाए रखें?

Author Written By: Shyamnandan Updated: Jan 6, 2026 13:56
Chanakya-Niti

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य, जिन्हें महान राजनीतिज्ञ और नीतिकार माना जाता है, ने अपने नीति शास्त्र पुस्तक में जीवन में सावधानी बरतने के कई सूत्र बताए हैं. उनके अनुसार, कुछ व्यक्तियों, परिस्थितियों और कार्यों में बीच में आने से व्यक्ति की अपनी ही इज्जत और सम्मान पर असर पड़ सकता है. यदि आप समझदारी दिखाना चाहते हैं तो इन 5 प्रकार के लोगों और उनकी गतिविधियों के बीच कभी नहीं आना चाहिए. आइए जानते हैं, ये 5 प्रकार के काम कौन-कौन से हैं?

दो विद्वानों का वार्तालाप

चाणक्य कहते हैं कि दो विद्वान लोग जब किसी विषय पर चर्चा कर रहे हों तो उनके बीच में घुसना नुकसानदायक हो सकता है. इनके बीच आने से न केवल आप समझ में कमतर दिखाई देंगे बल्कि बातचीत का सही ज्ञान भी आप तक नहीं पहुँच पाएगा. ऐसे समय में बेहतर है कि आप शांत रहें और उनकी बातों को ध्यान से सुनें.

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स्वामी और सेवक की बात

जब कोई स्वामी और उसका सेवक निजी या महत्वपूर्ण चर्चा कर रहे हों, तो बीच में आने से असमझदारी या विवाद हो सकता है. चाणक्य के अनुसार, सेवा और अधिकार के बीच की बातचीत में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है. यह केवल स्थिति को जटिल बना सकता है और आप खुद परेशानी में पड़ सकते हैं.

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पति-पत्नी की निजी बातें

पति और पत्नी के बीच की निजी बातचीत में हस्तक्षेप करना सम्मान के नुकसान का कारण बन सकता है. चाहे वह कोई छोटी या बड़ी बात हो, इसे बीच में रोकना रिश्तों में अनावश्यक तनाव पैदा कर सकता है. चाणक्य ने इस बात पर जोर दिया कि किसी के निजी संबंधों का सम्मान करना समझदारी है.

पंडित और हवन की प्रक्रिया

धार्मिक क्रियाओं के दौरान भी बीच में आने से बचना चाहिए. हवन या पूजा में पंडित और अग्नि के बीच हस्तक्षेप करने से क्रिया का माहौल बिगड़ सकता है. चाणक्य के अनुसार, धर्म और अनुष्ठान में सम्मान बनाए रखना ही बुद्धिमानी है.

किसान और खेती के काम

खेती के समय किसान और उसके हल या बैल के बीच में आने से कार्य प्रभावित हो सकता है. यह न केवल किसान के काम में बाधा डालता है बल्कि खुद को भी असमर्थ दिखाता है. चाणक्य यहां यह सिखाते हैं कि काम करने वालों की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना हमेशा हानिकारक होता है.

समझदारी की सीख

आचार्य चाणक्य के इन 4 उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि कभी-कभी सिर्फ समय और स्थान का सही चयन करना ही बुद्धिमानी है. चाणक्य हमें सिखाते हैं कि दूसरों के काम में बीच में आने से बचना ही सम्मान और सम्मानजनक जीवन की कुंजी है. जीवन में कई बार चुप रहना और सही समय का इंतजार करना सबसे बड़ा उपाय हो सकता है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है।News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

First published on: Jan 06, 2026 01:56 PM

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