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Religion

Amalaki Ekadashi Vrat Katha: आमलकी एकादशी व्रत के प्रभाव से बची थी राजकुमार वसुरथ की जान, पढ़ें विष्णु जी की महिमा की कथा

Amalaki Ekadashi Vrat Katha: आमलकी एकादशी के व्रत को पापों से मुक्ति और इच्छाओं को पूर्ण करने वाला उपवास माना गया है, जिसकी कथा में भगवान विष्णु की कृपा का बहुत ही सुंदर तरीके से वर्णन किया गया है. चलिए विस्तार से जानते हैं आमलकी एकादशी के व्रत की कथा के बारे में.

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Written By: Nidhi Jain Updated: Feb 25, 2026 06:55
Amalaki Ekadashi Vrat Katha
Credit- Meta AI

Amalaki Ekadashi Vrat Katha: सनातन धर्म के लोगों के लिए आमलकी एकादशी के व्रत का खास महत्व है, जो कि फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की तिथि पर रखा जाता है. इस बार 27 फरवरी 2026, वार शुक्रवार को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जा रहा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, आमलकी एकादशी के दिन व्रत रखने के साथ-साथ भगवान विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है. माना जाता है कि इस व्रत के फल के प्रभाव से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और एक सहस्र गोदान के समान फल मिलता है.

हालांकि, इस व्रत की पूजा पापी बहेलिया एवं राजकुमार वसुरथ की कथा सुने व पढ़े बिना पूरी नहीं होती है. यहां पर आप आमलकी एकादशी व्रत की कथा पढ़ सकते हैं.

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आमलकी एकादशी व्रत की कथा (amalaki ekadashi ki vrat katha)

प्राचीन समय में वैदिक नामक एक नगर था, जिस पर चैत्ररथ राजा चन्द्रवंशी का राज था. राजा चैत्ररथ विद्वान होने के साथ-साथ दयालु भी थे, जो देवी-देवताओं को बहुत मानते थे. उनके राज्य में ज्यादातर लोग भगवान विष्णु के भक्त थे, जो हर एकादशी का उपवास करते थे.

एक बार जब आमलकी एकादशी की तिथि आई तो राजा और उनकी प्रजा ने व्रत रखने का निश्चय किया, जिसके लिए नगर के मुख्य मंदिर में सामूहिक पूजा-पाठ और जागरण का आयोजन किया गया. जिस समय मंदिर में जागरण हो रहा था, तभी वहां बहेलिया नामक एक महापापी व दुराचारी व्यक्ति आया.

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बहेलिया जीव हिंसा करके अपना पेट भरता था, लेकिन उस दिन उसे खाने के लिए कुछ नहीं मिला. खाने की तलाश में वो मंदिर के अंदर आया और चुपचाप एक कोने में बैठकर आमलकी एकादशी की कथा के माध्यम से भगवान विष्णु की महिमा की गाथा सुनी. ऐसे में न चाहते हुए भी उसने पूरी रात जागरण किया और भूखा रहा.

अगले दिन व्रत के पारण के समय ही उसने भोजन किया. ऐसे में उसका आमलकी एकादशी का व्रत पूर्ण हो गया, लेकिन भोजन करने के कुछ देर बाद ही उसकी मृत्यु हो गई. जीव हिंसा करने के कारण उसे नरक में जाना था, लेकिन उसने आमलकी एकादशी का व्रत पूर्ण किया था, जिसकी वजह से उसका राजा विदुरथ के यहां जन्म हुआ.

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राजा विदुरथ ने अपने पुत्र का नाम वसुरथ रखा. वसुरथ एक अत्यन्त धार्मिक, कर्मवीर, सत्यवादी और विष्णु भक्त था, जो हमेशा अपनी प्रजा के हित में सोचता था. एक दिन वसुरथ अकेले वन में शिकार करने के लिए गया, लेकिन रास्ता भटक गया. काफी समय तक जब रास्ता नहीं मिला तो वो थक हारकर एक पेड़ के नीचे सो गया.

उसी समय पहाड़ी डाकू वहां आए और राजकुमार पर हमला किया. डाकुओं के अस्त्र-शस्त्र राजकुमार के शरीर से स्पर्श होने की जगह उन्हीं (डाकुओं) पर प्रहार करने लगे, जिससे वो मर गए. कुछ देर बाद जब राजकुमार की नींद खुली तो उन्होंने अपने आसपास सभी डाकुओं को मरा देखा और आसमान की तरफ देखकर सवाल किया ‘मेरी जान किसने बचाई?’.

इस बीच आकाशवाणी हुई ‘इस संसार में भगवान विष्णु के अलावा तेरी रक्षा कौन कर सकता है. पिछले जन्म में तूने आमलकी एकादशी का व्रत रखा था, जिसके कारण आज तेरी जान बच गई’. आकाशवाणी को सुनने के बाद राजकुमार ने विष्णु जी को स्मरण कर उन्हें प्रणाम किया और अपने नगर चला गया.

माना जाता है कि जो लोग सच्चे मन से आमलकी एकादशी का व्रत रखते हैं, उन्हें प्रत्येक कार्य में सफलता और अन्त में वैकुण्ठ धाम में जगह मिलती है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Feb 25, 2026 06:47 AM

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