चीन में एयर होस्टेस को अब सिर्फ यात्रियों की सेवा ही नहीं, बल्कि सेल्फ डिफेंस के लिए स्पेशल मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग भी दी जा रही है. 'विंग चुन' और 'किन ना' जैसी पारंपरिक चीनी तकनीकों के जरिए उन्हें किसी भी इमरजेंसी या हमले से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है.
क्या है विंग चुन?

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'विंग चुन' चीन का एक फेमस मार्शल आर्ट है. इसमें तेज रिएक्शन, कम दूरी से हमला रोकना और कम ताकत लगातार खुद को बचाना सिखाया जाता है. मार्शल आर्टिस्ट ब्रूस ली इसे ट्रेंड में लेकर आए. ये सेल्फ डिफेंस के लिए दुनिया की सबसे असरदार प्रणालियों में गिनी जाती है.
विंग चुन की खासियत क्या है?

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विंग चुन में तेज पंच, संतुलन, शरीर की सही स्थिति, एक साथ हमला और बचाव करने की कला सिखाई जाती है. ये तकनीक बड़े और ताकतवर प्रतिद्वंद्वी के सामने भी असरदार मानी जाती है. यही वजह है कि इसे महिलाओं के लिए भी बेहद फायदेमंद सेल्फ डिफेंस आर्ट माना जाता है.
क्या है किन ना?

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किन ना या चिन ना चीनी मार्शल आर्ट की एक खास तकनीक है. इसमें प्रतिद्वंद्वी के जोड़ों, मांसपेशियों और पकड़ बिंदुओं को नियंत्रित कर उसे काबू में किया जाता है. इसका इस्तेमाल बिना ज्यादा ताकत लगाए किसी व्यक्ति को रोकने या कंट्रोल करने के लिए किया जाता है. किन ना तकनीक में हाथों की पकड़, जोड़ लॉक करना, दबाव बिंदुओं पर कंट्रोल और प्रतिद्वंद्वी की स्पीड को सीमित करना शामिल होता है. सुरक्षा बलों और सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग में इसका ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि इससे हमलावर को गंभीर चोट पहुंचाए बिना कंट्रोल किया जा सकता है.
एयर होस्टेस के लिए क्यों जरूरी है ये ट्रेनिंग?

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उड़ान के दौरान कभी-कभी आक्रामक यात्रियों, झगड़ों या सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में एयर होस्टेस को खुद की और बाकी यात्रियों की सुरक्षा के लिए ट्रेनिंग दी जाती है. विंग चुन और किन ना जैसी तकनीकें उन्हें आत्मविश्वास और quick reaction ability देती है.
महिलाओं के लिए कितनी असरदार हैं ये तकनीकें?

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विशेषज्ञों के मुताबिक, विंग चुन और किन ना का विकास इस तरह किया गया है कि कम शारीरिक ताकत वाला व्यक्ति भी खुद का बचाव कर सके. इसलिए ये तकनीकें महिलाओं और केबिन क्रू के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती हैं.
दुनिया भर में बढ़ रहा है सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग का चलन

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सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में एयरलाइंस अपने कर्मचारियों को सुरक्षा और आत्मरक्षा से जुड़ा प्रशिक्षण दे रही हैं. बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच ऐसे कार्यक्रम यात्रियों और क्रू दोनों की सुरक्षा को मजबूत बनाने में मदद कर रहे हैं.
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