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दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार होने के बावजूद वेनेजुएला आज गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है. जानिए कैसे भारी तेल, भ्रष्टाचार, प्रतिबंध और गलत नीतियों ने इस अमीर देश को गरीब बना दिया.
दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार, फिर भी हाल बेहाल

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वेनेजुएला दुनिया में सबसे ज्यादा तेल भंडार रखने वाला देश है. यहां लगभग 303 अरब बैरल से ज्यादा तेल मौजूद है, जो इसे तेल के मामले में नंबर-1 बनाता है. लेकिन हैरानी की बात ये है कि इतनी बड़ी प्राकृतिक संपदा होने के बावजूद ये देश आज आर्थिक तंगी और गरीबी से जूझ रहा है.
‘भारी’ तेल बना सबसे बड़ी परेशानी

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वेनेजुएला के तेल की सबसे बड़ी समस्या इसकी क्वालिटी है. यहां मिलने वाला तेल 'एक्स्ट्रा हेवी क्रूड' होता है, जो बहुत ज्यादा गाढ़ा और चिपचिपा होता है. इस तरह के तेल को जमीन से निकालना, साफ करना और इस्तेमाल लायक बनाना काफी महंगा और तकनीकी रूप से मुश्किल होता है. यही वजह है कि तेल होने के बावजूद इससे ज्यादा मुनाफा नहीं हो पाता.
ऑयल प्रोडक्शन में आई भारी गिरावट

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एक समय ऐसा था जब वेनेजुएला रोजाना 30 से 35 लाख बैरल तेल का प्रोडक्शन करता था. लेकिन आज ये उत्पादन घटकर करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है. प्रोडक्शन में इस गिरावट की वजह खराब मशीनरी, निवेश की कमी और कुशल कर्मचारियों का देश छोड़कर जाना है. इसका सीधा असर देश की आय और आर्थिक स्थिति पर पड़ा है.
जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर ने बिगाड़ी हालत

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तेल निकालने के लिए जरूरी रिफाइनरी, पाइपलाइन और मशीनें अब काफी पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं. सरकार ने समय पर इनका रखरखाव या आधुनिकीकरण नहीं किया. इसकी वजह से कई बार प्रोडक्शन रुक जाता है या बहुत कम हो जाता है. कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर वेनेजुएला की सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक बन चुका है.
भ्रष्टाचार और गलत नीतियों का असर

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सरकारी तेल कंपनी PDVSA में सालों से भ्रष्टाचार और बुरे मैनेजमेंट की खबरें आती रही हैं. तेल से होने वाली कमाई का सही इस्तेमाल नहीं हुआ और कई फैसले राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर लिए गए. इससे देश की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई और जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा.
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने तोड़ी कमर

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अमेरिका और बाकी पश्चिमी देशों ने वेनेजुएला पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं. इन प्रतिबंधों के कारण देश के लिए तेल बेचना मुश्किल हो गया और विदेशी कंपनियों ने निवेश बंद कर दिया. तकनीकी मदद भी नहीं मिल पाई, जिससे तेल प्रोडक्शन और ज्यादा प्रभावित हुआ.
एक ही संसाधन पर निर्भरता बनी खतरा

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वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था लगभग पूरी तरह तेल पर निर्भर रही है. देश ने कृषि, उद्योग और बाकी क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. जब तेल की कीमतें गिरीं और उत्पादन कम हुआ, तो पूरी अर्थव्यवस्था चरमरा गई. आज वेनेजुएला में महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी चरम पर है. लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है. लाखों लोग बेहतर जिंदगी की तलाश में देश छोड़ चुके हैं.
(All Photos Credit: Freepik)