800KM भयानक स्पीड वाले तूफान से दहली थी दुनिया, क्या 800 साल बाद सूर्य पर फिर होगा विस्फोट?
धरती पर अकसर हवाएं तूफान बनकर तबाही मचाती हैं। समुद्र की तूफानी लहरें अकसर पूरा शहर डुबो देती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि धरती से लाखों मील दूर धधक रहे आग के गोले सूर्य पर भी तूफान आता है, जो धरती से टकराए तो प्रलय आएगी।

सूर्य की किरणें धरती पर जीवन का आधार हैं। इंसान के साथ-साथ पेड़ों और जीव-जंतुओं के जीने के लिए जरूरी हैं, लेकिन आग का गोला बनकर धधक रहा सूर्य धरती पर प्रलय मचाने की ताकत भी रखता है। आज से 800 साल पहले सूर्य धरती को दहला चुका है।
800 साल पहले सूर्य पर विस्फोट हुआ
2 / 7बता दें कि 800 साल पहले सूर्य पर भयानक विस्फोट हुआ था और सौर तूफान आया था। करीब 800 किलोमीटर प्रति सेकंड वाला तूफान धरती की ग्रैविटी से भी टकराया था, जिससे धरती पर आफत आ गई थी, लोगों ने लाल रंग की रोशनी आंखों से देखी थी।
जापान के कवि ने सौर तूफान देखा था
3 / 7800 साल पहले आए सौर तूफान और लाल रंग की रोशनी को जापान के एक कवि ने भी देखा था, जिसे उन्होंने अपनी डायरी में दर्ज किया था। उसी डायरी से वैज्ञानिकों ने सौर तूफान का राज खोला। एक कविता और पेड़ों के सबूत अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा करने में मदद कर रहे हैं।
जापानी कवि ने डायरी में दर्ज किया तूफान
4 / 7अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के हाथ जापान के कवि फुजीवारा नो तेइका की डायरी Meigetsuki लगी है, जिसमें 1204 में आसमान से आने वाली एक लाल रंग की रोशनी का जिक्र है, जो असल में एक खास तरह का ऑरोरा था। सौर तूफान आने पर ऐसा ही ऑरोरा दिखाई देता है।
सौर तूफान की पहचान लाल रंग का ऑरोरा
5 / 7बता दें कि अंतरिक्ष में लाल या हरे रंग का ऑरोरा दिखाई देता है, तब जब सूरज बहुत ज्यादा धधक रहा होता है और उनकी ऊर्जा की तपन भी जला देने वाली होती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि उस समय सूर्य पर विस्फोट के साथ तूफान आ रहा होता है।
अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की पेड़ों के तने की स्टडी
6 / 7जापानी कवि की डायरी में दर्ज पुराने दफन पेड़ों के तनों का अध्ययन वैज्ञानिकों ने किया। रिसर्च में पता चला कि सूरज से आने वाली रोशनी ने पेड़ों में कार्बन-14 के निशान छोड़े थे, जिससे पता चला कि 1200 के आसपास सूर्य पर बहुत शक्तिशाली ऊर्जा का विस्फोट हुआ था।
सौर तूफान के खतरे में था अपोलो-13 मिशन
7 / 7वैज्ञानिकों के अनुसार, 1972 में भी ऐसा ही भयानक सौर तूफान आया था, जो अगर अपोलो-13 मिशन से टकराता तो स्पेसक्राफ्ट में विस्फोट हो जाता। अंतरिक्ष यात्री खतरनाक रेडिएशन की चपेट में आ जाते। नए मून मिशन आर्टेमिस-2 पर भी सौर तूफान का खतरा मंडराया था।



















