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सूर्य की किरणें धरती पर जीवन का आधार हैं। इंसान के साथ-साथ पेड़ों और जीव-जंतुओं के जीने के लिए जरूरी हैं, लेकिन आग का गोला बनकर धधक रहा सूर्य धरती पर प्रलय मचाने की ताकत भी रखता है। आज से 800 साल पहले सूर्य धरती को दहला चुका है।
800 साल पहले सूर्य पर विस्फोट हुआ

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बता दें कि 800 साल पहले सूर्य पर भयानक विस्फोट हुआ था और सौर तूफान आया था। करीब 800 किलोमीटर प्रति सेकंड वाला तूफान धरती की ग्रैविटी से भी टकराया था, जिससे धरती पर आफत आ गई थी, लोगों ने लाल रंग की रोशनी आंखों से देखी थी।
जापान के कवि ने सौर तूफान देखा था

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800 साल पहले आए सौर तूफान और लाल रंग की रोशनी को जापान के एक कवि ने भी देखा था, जिसे उन्होंने अपनी डायरी में दर्ज किया था। उसी डायरी से वैज्ञानिकों ने सौर तूफान का राज खोला। एक कविता और पेड़ों के सबूत अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा करने में मदद कर रहे हैं।
जापानी कवि ने डायरी में दर्ज किया तूफान

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अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के हाथ जापान के कवि फुजीवारा नो तेइका की डायरी Meigetsuki लगी है, जिसमें 1204 में आसमान से आने वाली एक लाल रंग की रोशनी का जिक्र है, जो असल में एक खास तरह का ऑरोरा था। सौर तूफान आने पर ऐसा ही ऑरोरा दिखाई देता है।
सौर तूफान की पहचान लाल रंग का ऑरोरा

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बता दें कि अंतरिक्ष में लाल या हरे रंग का ऑरोरा दिखाई देता है, तब जब सूरज बहुत ज्यादा धधक रहा होता है और उनकी ऊर्जा की तपन भी जला देने वाली होती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि उस समय सूर्य पर विस्फोट के साथ तूफान आ रहा होता है।
अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की पेड़ों के तने की स्टडी

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जापानी कवि की डायरी में दर्ज पुराने दफन पेड़ों के तनों का अध्ययन वैज्ञानिकों ने किया। रिसर्च में पता चला कि सूरज से आने वाली रोशनी ने पेड़ों में कार्बन-14 के निशान छोड़े थे, जिससे पता चला कि 1200 के आसपास सूर्य पर बहुत शक्तिशाली ऊर्जा का विस्फोट हुआ था।
सौर तूफान के खतरे में था अपोलो-13 मिशन

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वैज्ञानिकों के अनुसार, 1972 में भी ऐसा ही भयानक सौर तूफान आया था, जो अगर अपोलो-13 मिशन से टकराता तो स्पेसक्राफ्ट में विस्फोट हो जाता। अंतरिक्ष यात्री खतरनाक रेडिएशन की चपेट में आ जाते। नए मून मिशन आर्टेमिस-2 पर भी सौर तूफान का खतरा मंडराया था।