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Sea Boundary Rules: क्या आप जानते हैं कि जमीन की तरह समुद्र में भी देशों की सरहदें बंटी हुई हैं? किसी भी देश की मनमानी को रोकने और समुद्री संसाधनों के सही बंटवारे के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास नियम बनाए गए हैं. संयुक्त राष्ट्र की UNCLOS संधि यह तय करती है कि समुद्र के किस हिस्से पर किस देश का कितना अधिकार होगा?
कैसे शुरू होती है समुद्री सरहद?

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समुद्र की सीमा की शुरुआत 'बेसलाइन' से होती है. यह तट के किनारे खींची गई एक काल्पनिक रेखा है. इसके अंदर का हिस्सा 'आंतरिक जल' कहलाता है, जिस पर देश का वैसा ही पूरा हक होता है जैसे उसकी जमीन पर.
12 से 24 नॉटिकल मील का गणित

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बेसलाइन से समुद्र में 12 नॉटिकल मील तक के क्षेत्र को 'टेरिटोरियल समुद्र' कहा जाता है. यहां देश का पूरा कंट्रोल होता है, लेकिन दूसरे देशों के जहाजों को शांतिपूर्ण तरीके से गुजरने की अनुमति होती है. इसके आगे 24 नॉटिकल मील तक 'कंटिजियस जोन' होता है, जहाँ देश को टैक्स वसूली, सुरक्षा और इमिग्रेशन से जुड़े कानून लागू करने की शक्ति मिलती है.
खनिज और मछलियों पर किसका हक?

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सबसे महत्वपूर्ण होता है EEZ (एक्सक्लूसिव इकॉनोमिक जोन), जो तट से 200 नॉटिकल मील तक फैला होता है. इस दायरे में आने वाले तेल, गैस और मछलियों जैसे संसाधनों पर केवल उसी तटीय देश का हक होता है. हालांकि, यहां से दूसरे देशों के जहाज गुजर सकते हैं.
हाई सीज: सबका साझा आसमान

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200 नॉटिकल मील के बाद का विशाल इलाका 'हाई सीज' कहलाता है. यह किसी एक देश की जागीर नहीं है. यहां दुनिया के सभी देशों को रिसर्च करने, मछली पकड़ने और जहाज चलाने का बराबर अधिकार है. इसी सिस्टम की वजह से समुद्र में देशों के बीच विवादों का निपटारा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत शांति से किया जाता है.