तीसरा विश्व युद्ध दस्तक देने वाला है? 5 पाइंट में जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ, क्यों है वर्ल्ड वॉर शुरू होने का खतरा

Risk of World War: दुनिया धीरे-धीरे तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है, इसकी आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है कि कहीं मिडिल ईस्ट के संकट का दायरा बढ़ न जाए, क्योंकि इस जंग से न सिर्फ ईरान प्रभावित हो रहा है, बल्कि कई देश इसकी आग में जल रहे हैं।

Iran Attacks Amazon in bahrain
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मिडिल ईस्ट की जंग चरम पर है। न इजरायल पीछे हटने को तैयार है और न ही ईरान हार मानने के तैयार है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी ईरान पर और अगले 2-3 हफ्ते में बड़ा हमला करने का संकेत दे चुके हैं। इसलिए दुनियाभर के शांति विशेषज्ञों को चिंता सता रही है कि क्षेत्रीय युद्ध का दायरा बढ़ सकता है। क्योंकि युद्ध में ईरान, इजरायल और अमेरिका के अलावा UAE, इराक, बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब, ओमान, अजरबैजान, वेस्ट बैंक, साइप्रस, सीरिया, कतर और लेबनान शामिल हैं। किंग्स कॉलेज लंदन में इंटरनेशनल हिस्ट्री के प्रोफेसर जो माइलो कहते हैं कि कोई भी विश्व युद्ध तब होता है, जब दुनिया की सारी प्रमुख शक्तियां उसमें शामिल हो जाती हैं।

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विश्व युद्ध भड़कने की आशंका क्यों है?

विश्व युद्ध भड़कने की आशंका क्यों है?2 / 5

ब्रिटेन की ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की इंटरनेशनल हिस्ट्री की प्रोफेसर एमेरिटस मार्गरेट मैकमिलन ने BBC के ग्लोबल स्टोरी पॉडकास्ट में तीसरा विश्व युद्ध छिड़ने की आशंका जताई है। मैकमिलन कहती हैं कि पहला विश्वयुद्ध विरोधियों की एक दूसरे के बारे में गलतफहमी की वजह से ही हुआ था। ऑस्ट्रिया-हंगरी के सम्राट फ्रांज जोसेफ के भतीजे आर्चड्यूक फ्रांज फर्डिनेंड की हत्या ने 1914 में प्रथम विश्व युद्ध शुरू करने वाली घटनाओं की ट्रिगर किया था। इन घटनाओं ने पूरे यूरोप को इस संघर्ष में खींच लिया था। जर्मनी ने ऑस्ट्रिया और रूस ने सर्बिया का समर्थन किया। फ्रांस ने रूस और ब्रिटेन ने सम्मान-रणनीति के नाम पर जंग जॉइन की, फिर वैश्विक तबाही मची।

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तीसरे विश्व युद्ध का जोखिम कैसे बढ़ेगा?

तीसरे विश्व युद्ध का जोखिम कैसे बढ़ेगा?3 / 5

प्रोफेसर मैकमिलन कहती हैं कि तीसरे विश्व युद्ध के बढ़ने का कारण ईरान और इसके सहयोगी जैसे यमन में हूती विद्रोही हो सकते हैं। ईरान की कार्रवाई जैसे होर्मुज स्ट्रेट को बंद करना, समुद्री जहाजों पर हमले करना वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डाल सकती है। ऊर्जा आपूर्ति बाधित होगी तो बड़े देशों को दिक्कत होगी। क्योंकि अमेरिका पहले से जंग का हिस्सा है। अगर अन्य महाशक्तियां इसे जॉइन करती हैं तो तनाव और संघर्ष का दायरा बढ़ना तय है। वहीं मिडिल ईस्ट में तनाव से दुनिया के दूसरे कोने में तनाव बढ़ सकता है। जैसे चीन ताइवान के खिलाफ कदम उठा सकता है। रूस यूक्रेन पर हमले तेज कर सकता है। क्योंकि जो लोग इन्हें रोक सकते हैं, वे पहले से कहीं और बिजी हैं।

विश्व युद्ध के आगाज में नेताओं की भूमिका?

विश्व युद्ध के आगाज में नेताओं की भूमिका?4 / 5

मैकमिलन कहती हैं कि युद्ध अक्सर घमंड, सम्मान पाने की भावना या विरोधियों के डर की वजह से शुरू होते हैं। इतिहास पर नजर डालें और अंदाजा लगाए तो विश्व नेता और घटनाएं युद्ध की दिशा तय कर सकती हैं। जैसे प्रथम विश्व युद्ध में जब बड़ा नुकसान हो गया और बहुत से लोग मारे गए तो नेताओं ने तय किया कि जब तो जीतने के लिए जंग को जारी रखना चाहिए। जैसे पुतिन ने 4 साल पहले जब यूक्रेन पर हमला किया था तो कहा था कि लक्ष्य यूक्रेन का निरस्त्रीकरण और डी-नाजिफिकेशन करना है, लेकिन 4 साल बाद भी वे कह रहे हैं कि यूक्रेन में उसके सैन्य उद्देश्य अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। जो नेता नाकामी स्वीकार करने या पीछे हटने से इनकार करते हैं, वे जंग को जारी रखते हैं। जैसे एडोल्फ हिटलर जैसे नेता हार तय होने के बाद भी लड़ाई जारी रखते रहे।

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मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने के रास्ते क्या है?

मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने के रास्ते क्या है?5 / 5

मैकमिलन कहती हैं कि मिडिल ईस्ट का तनाव कम करने के लिए कूटनीति बहुत जरूरी है। युद्धक्षेत्र में लड़ते-लड़ते दूसरे पक्ष से बातचीत होती रहनी चाहिए और उनके संपर्क में रहना चाहिए। शीत युद्ध में NATO के जरिए सभी पक्षों के बीच संवाद हुआ था, तभी शीत युद्ध खत्म हुआ था। वर्तमान में भी हालात बहुत अस्थिर हैं, जिन्हें इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन को शांत करना होगा। जब बड़ी शक्तियां किसी जंग में शामिल होती हैं तो तनाव कम करने की नीतियों में परमाणु हथियारों का होना हमेशा एक महत्वपूर्ण कारक होता है। इजरायल , अमेरिका और ईरान को यह समझना चाहिए कि वे अपनी अचीवमेंट्स की लिमिट तक पहुंच चुके हैं। जंग जारी रहने से किसी को भी वांछित परिणाम नहीं मिलेंगे। केवल मध्यस्थता के जरिए ही मिडिल ईस्ट की जंग रोकी जा सकती है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

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खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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