इच्छामृत्यु को आज के दिन इस देश ने सबसे पहले दी थी मान्यता, जानें कितने देशों में Euthanasia वैध, भारत में क्या हैं नियम?

इंसान या जीव हत्या करना, जीने का अधिकार छीनना पाप है। दुनियाभर के देशों में हत्या करने पर सजा का प्रावधान है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया के कई देशों में लोगों को अपनी इच्छा से मरने का अधिकार भी प्राप्त है, जिसे इच्छामृत्यु कहा जाता है। जी हां, इच्छामृत्यु का अधिकार देने वाले देशों में भारत भी शामिल है। आइए इच्छामृत्यु से जुड़े आज के दिन का इतिहास जानते हैं...

euthanasiam
1 / 7

आज ही के दिन साल 2002 में इच्छामृत्यु को यूरोपीय देश नीदरलैंड में कानूनी मान्यता मिली थी। नीदरलैंड दुनिया का पहला देश है, जिसने इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता देकर वैध बनाया था। नीदरलैंड के कानून के अनुसार 12 साल की उम्र के बाद नाबालिग को भी इच्छामृत्यु का अधिकार है।

विज्ञापन

दुनिया में इन देशों में इच्छामृत्यु कानूनी अधिकार

दुनिया में इन देशों में इच्छामृत्यु कानूनी अधिकार2 / 7

बता दें कि बेल्जियम, कनाडा, कोलंबिया, इक्वाडोर, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल, स्पेन , उरुग्वे, ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स, क्वींसलैंड, साउथ ऑस्ट्रेलिया, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया, तस्मानिया, विक्टोरिया और अमेरिका के 10 राज्यों में लोगों को इच्छामृत्यु का अधिकार प्राप्त है।

विज्ञापन

बेल्जियम में नियम उल्लंघन पर 3 साल की सजा

बेल्जियम में नियम उल्लंघन पर 3 साल की सजा3 / 7

बेल्जियम में साल 2002 में लाइलाज बीमारी से पीड़ित लोगों और असहनीय दर्द झेल रहे मरीजों को इच्छामृत्यु की इजाजत मिली थी, लेकिन इच्छामृत्यु के नियमों का पालन न करने पर मरने में सहयोग करने वाले को एक से 3 साल की सजा हो सकती है। यूरोप के छोटे से देश लक्जमबर्ग ने साल 2009 में लाइलाज बीमारी से पीड़ित और ब्रेनडेड लोगों के लिए इच्छामृत्यु को वैध कर दिया। लेकिन मरीज को मांग करनी पड़ेगी और 2 डॉक्टरों के साथ-साथ मेडिकल पैनल से लिखवाकर देना होगा कि उसे इच्छामृत्यु दी जाए।

स्विटजरलैंड में विदेशियों को भी इच्छामृत्यु का अधिकार

स्विटजरलैंड में विदेशियों को भी इच्छामृत्यु का अधिकार4 / 7

कोलंबिया में साल 2015 में इच्छामृत्यु को मान्यता दी गई थी और ऐसा करने वाला वह लैटिन अमेरिका का पहला देश है। स्विटजरलैंड में विदेशियों को भी इच्छा से मरने का कानूनी अधिकार प्राप्त है। यहां मरीज की इच्छा से मेडिकली उसे मौत देना कानूनी अपराध नहीं है। कनाडा ने साल 2016 में इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता दी थी। क्यूबेक प्रांत में सबसे पहले डॉक्टर की मदद से खुद की जान लेने का अधिकार देने के लिए कानून बनाया गया था।

विज्ञापन

अमेरिका के 10 राज्यों में इच्छामृत्यु कानूनी अधिकार

अमेरिका के 10 राज्यों में इच्छामृत्यु कानूनी अधिकार5 / 7

अमेरिका में कैलिफोर्निया, न्यू जर्सी समेत 10 राज्यों में इच्छामृत्यु का कानूनी अधिकारी लोगों को प्राप्त है। वहीं ऑस्ट्रेलिया में साल 2019 में इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता मिली थी, लेकिन सिर्फ 6 राज्यों में यह लागू है। इस राज्यों में डॉक्टर के द्वारा दवाई लेकर मरीज दुनिया को छोड़ सकता है। ऑस्ट्रेलिया में लाइलाज बीमारी या असहनीय पीड़ा झेल रहे लोग या जो ब्रेनडेड हैं, वे इच्छामृत्यु की मांग कर सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में सबसे पहले इसे कानूनी बनाया गया था।

जर्मनी में एक साल 108 ने मांगी इच्छामृत्यु

जर्मनी में एक साल 108 ने मांगी इच्छामृत्यु6 / 7

जर्मनी ने साल 2017 में दवाई लेकर इच्छामृत्यु का अधिकार दिया था। जिसके बाद एक साल के अंदर इच्छामृत्यु चाहने वाले 108 लोगों ने आवेदन किया था। स्पेन ने साल 2021 में, ऑस्ट्रिया ने साल 2022 में और इक्वाडोर में साल 2024 में संवैधानिक अदालत ने इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता दी थी। बता दें कि ऑस्ट्रिया में इच्छामृत्यु के रूप में 'असिस्टेड सुसाइड' को कानूनी मान्यता प्राप्त है।

विज्ञापन

भारत में पैसिस यूथेनेसिया कानूनन मान्य

भारत में पैसिस यूथेनेसिया कानूनन मान्य7 / 7

भारत में साल 2018 में 'लिविंग विल' और पैसिव यूथेनेसिया को कानूनी मान्यता मिली थी, यानी अगर कोई मरीज वेंटिलेटर पर है और उसके बचने की गुंजाइश नहीं है तो लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाकर मरीज को शर्तों के साथ गरिमामय तरीके से दुनिया को अलविदा करने की इजाजत मिल सकती है। भारत के अब तक 2 बार इच्छामृत्यु दी गई है। पहली मुंबई की अरुणा शानबाग को, जो 1973 में रेप का शिकार होने के बाद 42 साल तक 'पर्मानेंट वेजिटेटिव स्टेट' (चेतनाहीन अवस्था) में थीं।। दूसरी उत्तर प्रदेश हरीश राणा को, जो साल 2013 में हादसे का शिकार होने के बाद सिर में चोट लगने की वजह से कोमा में चले गए थे और 13 साल से कोमा में ही थे।

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
... और पढ़ें
विज्ञापन