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बाबा वेंगा पुरुष नहीं, बल्कि एक महिला हैं, जो नेत्रहीन थीं। उन्हें उन्हें 'बाल्कन नॉस्ट्राडेमस' भी कहते हैं। लेकिन बाबा वेंगा नाम के पीछे का एक राज भी है। बाबा वेंगा का असली नाम वेंगेलिया पांडेवा सुरचेवा था, जो बाद में गुश्तरोवा हो गया। उनका जन्म 3 अक्टूबर 1911 को उत्तरी मेसिडोनिया स्ट्रुमिका शहर में हुआ था।
परिवार ने ऐसे रखा था नाम

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क्योंकि बाबा वेंगा का जन्म समय से पहले हो गया था, लेकिन उनका नाम महीनों बाद रखा गया। बुल्गारिया की परंपरा के अनुसार, सड़क पर चलते किसी अजनबी से नाम पूछा जाता हैं और परिवार को जो अच्छा लगता है, वह नाम रख लिया जाता है। एक शख्स ने 'वेंगेलिया' नाम सुझाया, जो ग्रीक नाम 'इवांजेलिया' का बुल्गारियन रूप है और जिसका अर्थ 'शुभ समाचार लाने वाली' या 'ईसाई सुसमाचार' से जुड़ा है।
12 साल की उम्र में नेत्रहीन

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बता दें कि 12 साल की उम्र में वेंगेलिया एक भयानक तूफान में फंस गई थीं। तूफान में चोट लगने के कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। फिर भी उन्होंने अपनी आध्यात्मिक शक्तियां कमजोर नहीं पड़ने दीं। अथक प्रयास के बाद उन्होंने शक्तियां विकसित की और भविष्य देखने का दावा किया।
'वेंगेलिया' से निकनेमा वेंगा मिला

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दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 1945 में बाबा वेंगा ने भविष्यवाणी की थी कि सेना वापस चली जाएगी। जब उनकी यह भविष्यवाणी सच साबित हुई तो लोग उन्हें इज्जत देते हुए बुजुर्ग दादी कहने लगे। ऐसे ही करते-करते एक दिन उन्हें वेंगेलिया की जगह वेंगा कहा जाने लगा। छोटा नाम रखने की कोशिश में वेंगा नाम मिला।
बुल्गारिया में बाबा मतलब दादी

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वेंगेलिया की उम्र बढ़ने लगी तो बच्चे उन्हें दादी कहने लगे। क्योंकि बच्चे दादी कहते हैं और बड़े-बूढ़े उन्हें सम्मान देना चाहते थे। इसलिए जब वेंगा बुल्गारिया के लिए पेचित्र गांव में रहकर सेवा करने लगीं तो लोग उन्हें मानने लगे और सम्मान देने के लिए उन्हें दादी कहने की बजाय बुल्गारियन लैंग्वेज में बाबा वेंगा कहने लगे।
महिलाओं के लिए सम्मानित शब्द

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बाबा वेंगा की मौत 84 साल की उम्र में 1996 में हुई थी। उस समय तक वे 'बाबा वेंगा' के नाम से दुनियाभर में मशहूर हो चुकी थीं। 1940 के दशक से ही लोग उन्हें 'बाबा वेंगा' कहने लगे थे। बुल्गारिया में 'बाबा' शब्द बुजुर्ग महिलाओं के प्रति आदर का प्रतीक है। यह पुरुष को संबोधित किया जाने वाला शब्द नहीं है।