
1 / 7
आज के समय में गर्भ में पल रहे बच्चे का जेंडर जानने को लेकर हर देश के अपने अलग नियम हैं. कुछ देशों में यह पूरी तरह कानूनी है, जबकि कई देशों में इस तरह की टेस्ट पर सख्त प्रतिबंध लागू हैं. आइए जानते हैं किन देशों में जेंडर जानना लीगल है.
भारत में कैसा है कानून?

2 / 7
भारत में गर्भावस्था के दौरान बच्चे का लिंग जानना और बताना पूरी तरह गैरकानूनी है. यह नियम भ्रूण लिंग चयन को रोकने और समाज में संतुलन बनाए रखने के लिए लागू किया गया है.
कानून का पालन क्यों जरूरी

3 / 7
भारत में इस विषय पर सख्त कानून इसलिए बनाया गया ताकि बेटियों के प्रति भेदभाव कम हो सके. भारत में Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques (PCPNDT) Act, 1994 के तहत गर्भ में बच्चे का लिंग जानना और बताना पूरी तरह बैन है. इस नियम का उल्लंघन करने पर डॉक्टर और माता-पिता दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है, जिसमें बड़ा जुर्माना और जेल दोनों शामिल है.
किन देशों में जेंडर बताने की मिलती है अनुमति

4 / 7
दुनिया के कई देशों जैसे अमेरिका और मेक्सिको में गर्भावस्था के दौरान बच्चे का जेंडर जानना आम बात है. यहां क्लिनिक में टेस्ट के जरिए माता-पिता को यह जानकारी आसानी से दी जाती है, कि उन्हें बेटा होगा या बेटी.
कुछ देशों में शर्तों के साथ दी जाती है छूट

5 / 7
कुछ जगहों पर जेंडर बताने की अनुमति पूरी तरह नहीं, बल्कि विशेष परिस्थितियों में दी जाती है. उदाहरण के तौर पर, कुछ देशों में गंभीर आनुवंशिक बीमारी की आशंका होने पर डॉक्टर यह जानकारी साझा कर सकते हैं.
पाकिस्तान में क्या है जेंडर रिवील को लेकर स्थिति

6 / 7
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में इस विषय पर भारत की तरह कोई स्पष्ट राष्ट्रीय कानून नहीं है. हालांकि पाकिस्तान में सामान्य तौर पर गर्भावस्था के दौरान Gender Reveal करने की कानूनी रूप से अनुमति नहीं है.
किन देशों में पूरी तरह लगा हुआ है प्रतिबंध

7 / 7
भारत के अलावा चीन और वियतनाम जैसे देशों में भी गर्भ में बच्चे का जेंडर बताने पर पूरी तरह रोक है. इन नियमों का उद्देश्य समाज में लिंग संतुलन बनाए रखना और भेदभाव को रोकना है.
अस्वीकरण: यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और पब्लिक डोमेन में मौजूद अन्य स्रोतों पर आधारित हैं. News24 इनकी पुष्टि नहीं करता है. (Image: Pexels)