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Ganga Expressway New Technology: भारत में होने वाले अधिकतर सड़क हादसों के लिए ड्राउजी ड्राइविंग यानि ड्राइविंग के दौरान नींद जिम्मेदार होती है, गंगा एक्सप्रेसवे पर खास तकनीक का प्रयोग किया गया है जो ड्राइवर की थकान और नींद को दूर करने का काम करेगी. इससे हादसे भी कम होंगे.
व्हाइट लाइन फीवर से सुस्त पड़ता है दिमाग

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खास तकनीक का उद्देश्य गंगा एक्सप्रेसवे पर ड्राइविंग के दौरान ड्राइवर को व्हाइट लाइन फीवर से बचाना है. व्हाइट लाइन फीवर वह स्थिति है, जिसमें लगातार एक सड़क पर चलते-चलते सफेद लाइनें देख-देखकर ड्राइवर का दिमाग सुस्त पड़ जाता है और वह बिना दिमाग के इधर उधर गाड़ी चलाता है और हादसा कर बैठता है
कैसे काम करेगी खास सेफ्टी तकनीक?

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गंगा एक्सप्रेसवे पर रोड के दोनों किनारों पर ‘रंबल स्ट्रिप्स’लगाई हैं, यह खास लाइनें हैं, जिनपर गाड़ी का टायर चढ़ते ही कंपन और तेज आवाज पैदा होगी जो ड्राइवर को अलर्ट करेगी, ताकि वह गाड़ी को सही दिशा में ड्राइव करे और उसे चौकन्ना भी बनाएगी. साधारण होने पर भी इस तकनीक को ज्यादा प्रभावी माना गया है.
AI से होगी एक्सप्रेसवे की मॉनिटरिंग

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गंगा एक्सप्रेस पर इस खास तकनीक की मॉनिटरिंग के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम भी लगाया जा रहा है. जगह जगह फुल एचडी कैमरों से वाहनों की मॉनीटरिंग भी की जाएगी, ताकि खतरे को पहचान तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजा सके. पुलिस और इमरजेंसी टीम भी एक्टिव रहेगी.
गंगा एक्सप्रेस वे पर लैंड हो सकेंगे विमान

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गंगा एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत इसका एयर स्ट्रिप है, जहां जरूरत पड़ने पर इंडियन एयरफोर्स के विमान भी लैंड करवाए जा सकते हैं. प्राकृतिक आपदा या अन्य आपातकालीन स्थिति में इसका इस्तेमाल बचाव कार्यों में तेजी लाने के लिए किया जा सकेगा.