दुनियाभर में सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों ने जहां आम लोगों को हैरान कर रखा है, वहीं प्रकृति की गोद में एक ऐसा जीव भी मौजूद है जिसकी लार की कीमत के आगे ये कीमती धातुएं भी फीकी पड़ जाती हैं. 'स्विफ्टलेट' नाम की एक अनोखी चिड़िया अपने घोंसले को तिनकों या पत्तियों से नहीं, बल्कि अपनी लार (सलाइवा) से तैयार करती है, जो हवा के संपर्क में आकर पूरी तरह ठोस रूप ले लेती है.
लाखों में होती है घोंसले की कीमत

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स्विफ्टलेट अपनी लार से कप के आकार का घोंसला बनाती है जो हवा में सूखकर ठोस बन जाता है. शुद्ध घोंसलों की कीमत कई स्थानों पर लाखों रुपये प्रति किलो तक पहुंचती है, इसलिए इन्हें 'प्राकृतिक सोना' कहा जाता है. चीन, हांगकांग और सिंगापुर जैसे बाजारों में बर्ड नेस्ट सूप के रूप में इसी काफी डिमांड होती है.
कहां पाई जाती है ये चिड़िया?

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घोंसला चिपचिपी लार से बनाया जाता है, जिसे चिड़िया कई दिनों तक चिपकाकर आकार देती है. ये घोंसले अक्सर ऊंची चट्टानों, समुद्री किनारों की गुफाओं और अंधेरी जगहों पर बने मिलते हैं. ऐसे स्थानों तक पहुंचना कठिन होता है.
क्यों है बर्ड नेस्ट सूप की डिमांड?

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बर्ड नेस्ट सूप चीनी पारंपरिक चिकित्सा में पोषक और इम्यूनिटी-बढ़ाने वाला माना जाता है और विशेष अवसरों पर परोसा जाता है. इसे गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्वास्थ्य संवेदनशील लोगों के लिए लाभकारी कहा जाता है.
घोंसलों की तस्करी

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मांग बढ़ने से वनों और गुफाओं में से घोंसलों की अवैध कटाई और तस्करी बढ़ी है, जिससे स्विफ्टलेट की आबादी पर नकारात्मक असर पड़ा है. कई स्थानों पर घोंसला तोड़कर निकाले जाने से प्रजनन दर घट रही है और स्थानीय इकोसिस्टम प्रभावित हो रहे हैं.
फार्मिंग और कृत्रिम घोंसला

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कुछ देशों में नियंत्रित फार्मिंग और कृत्रिम घोंसला बनाने के कार्यक्रम शुरू किए गए हैं ताकि प्राकृतिक घोंसलों पर दबाव कम हो सके. पर्यावरण मानकों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से यह व्यापार टिकाऊ बनाया जा सकता है.
क्या भारत में भी पाई जाती है ये चिड़िया?

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भारत में स्विफ्टलेट की सीमित आबादी पाई जाती है और हार्वेस्टिंग पर सख्त नियम हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मांग का प्रभाव स्थानीय स्तर पर भी महसूस किया जाता है.