इस चिड़िया की लार की कीमत जान भूल जाएंगे सोना-चांदी, घोंसले तक पहुंच पाना इतना भी आसान नहीं

दुनियाभर में सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों ने जहां आम लोगों को हैरान कर रखा है, वहीं प्रकृति की गोद में एक ऐसा जीव भी मौजूद है जिसकी लार की कीमत के आगे ये कीमती धातुएं भी फीकी पड़ जाती हैं. 'स्विफ्टलेट' नाम की एक अनोखी चिड़िया अपने घोंसले को तिनकों या पत्तियों से नहीं, बल्कि अपनी लार (सलाइवा) से तैयार करती है, जो हवा के संपर्क में आकर पूरी तरह ठोस रूप ले लेती है.

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दुनियाभर में सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों ने जहां आम लोगों को हैरान कर रखा है, वहीं प्रकृति की गोद में एक ऐसा जीव भी मौजूद है जिसकी लार की कीमत के आगे ये कीमती धातुएं भी फीकी पड़ जाती हैं. 'स्विफ्टलेट' नाम की एक अनोखी चिड़िया अपने घोंसले को तिनकों या पत्तियों से नहीं, बल्कि अपनी लार (सलाइवा) से तैयार करती है, जो हवा के संपर्क में आकर पूरी तरह ठोस रूप ले लेती है.

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लाखों में होती है घोंसले की कीमत

लाखों में होती है घोंसले की कीमत2 / 7

स्विफ्टलेट अपनी लार से कप के आकार का घोंसला बनाती है जो हवा में सूखकर ठोस बन जाता है. शुद्ध घोंसलों की कीमत कई स्थानों पर लाखों रुपये प्रति किलो तक पहुंचती है, इसलिए इन्हें 'प्राकृतिक सोना' कहा जाता है. चीन, हांगकांग और सिंगापुर जैसे बाजारों में बर्ड नेस्ट सूप के रूप में इसी काफी डिमांड होती है.

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कहां पाई जाती है ये चिड़िया?

कहां पाई जाती है ये चिड़िया?3 / 7

घोंसला चिपचिपी लार से बनाया जाता है, जिसे चिड़िया कई दिनों तक चिपकाकर आकार देती है. ये घोंसले अक्सर ऊंची चट्टानों, समुद्री किनारों की गुफाओं और अंधेरी जगहों पर बने मिलते हैं. ऐसे स्थानों तक पहुंचना कठिन होता है.

क्यों है बर्ड नेस्ट सूप की डिमांड?

क्यों है बर्ड नेस्ट सूप की डिमांड?4 / 7

बर्ड नेस्ट सूप चीनी पारंपरिक चिकित्सा में पोषक और इम्यूनिटी-बढ़ाने वाला माना जाता है और विशेष अवसरों पर परोसा जाता है. इसे गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्वास्थ्य संवेदनशील लोगों के लिए लाभकारी कहा जाता है.

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घोंसलों की तस्करी

घोंसलों की तस्करी5 / 7

मांग बढ़ने से वनों और गुफाओं में से घोंसलों की अवैध कटाई और तस्करी बढ़ी है, जिससे स्विफ्टलेट की आबादी पर नकारात्मक असर पड़ा है. कई स्थानों पर घोंसला तोड़कर निकाले जाने से प्रजनन दर घट रही है और स्थानीय इकोसिस्टम प्रभावित हो रहे हैं.

फार्मिंग और कृत्रिम घोंसला

फार्मिंग और कृत्रिम घोंसला6 / 7

कुछ देशों में नियंत्रित फार्मिंग और कृत्रिम घोंसला बनाने के कार्यक्रम शुरू किए गए हैं ताकि प्राकृतिक घोंसलों पर दबाव कम हो सके. पर्यावरण मानकों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से यह व्यापार टिकाऊ बनाया जा सकता है.

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क्या भारत में भी पाई जाती है ये चिड़िया?

क्या भारत में भी पाई जाती है ये चिड़िया?7 / 7

भारत में स्विफ्टलेट की सीमित आबादी पाई जाती है और हार्वेस्टिंग पर सख्त नियम हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मांग का प्रभाव स्थानीय स्तर पर भी महसूस किया जाता है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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