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चटपटी और तीखी झालमुरी का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसे संस्कृत में क्या कहते हैं. बंगाल के इस मशहूर स्ट्रीट फूड का संस्कृत नाम इतना अनोखा है कि इसे सुनकर आप अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे.
क्या संस्कृत में भी है इसका जिक्र?

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झालमुरी एक आधुनिक डिश है इसलिए प्राचीन ग्रंथों में इसका कोई एक सीधा नाम नहीं मिलता है. लेकिन वैज्ञानिकों और भाषा के जानकारों ने इसके मुख्य सामान के आधार पर एक बहुत ही दिलचस्प नाम खोज निकाला है.
मुरी को क्या कहते हैं?

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संस्कृत भाषा में मुरमुरे यानी मुरी को 'लाजाह' या 'मुरमुरम' के नाम से जाना जाता है. यह शब्द सुनने में जितना सरल है उतना ही पढ़ने में मजेदार लगता है जो इस डिश की मुख्य पहचान है.
'झाल' शब्द का क्या है मतलब?

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झालमुरी में झाल का मतलब तीखा होता है जिसकी उत्पत्ति संस्कृत के 'ज्वल' शब्द से हुई है जिसका अर्थ जलना होता है. यही वजह है कि इसके स्वाद को संस्कृत में 'कटु' या 'तीक्ष्ण' कहा जाता है.
क्या निकला नया नाम?

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अगर हम तीखे स्वाद और मुरमुरे को आपस में मिला दें तो इसे संस्कृत में 'कटु-लाजाह' कहा जा सकता है. इसके अलावा आप इसे 'तीक्ष्ण-मुरमुरम' भी कह सकते हैं जो सुनने में काफी भारी-भरकम लगता है.
क्यों है यह इतना मजेदार?

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आज से पहले शायद ही आपने झालमुरी का ऐसा शुद्ध और शास्त्रीय नाम सुना होगा जो सबको हैरान कर दे. अगली बार जब आप मुरी खाएं तो इस संस्कृत नाम को याद कर अपने दोस्तों को जरूर चौंकाएं.