दुनियाभर में मुस्लिम समुदाय Eid al-Adha यानी बकरीद की तैयारियों में जुटा हुआ है. भारत में यह त्योहार 28 मई को मनाया जाएगा. इस्लामी कैलेंडर के जुल हिज्जा महीने में आने वाला यह पर्व कुर्बानी और आस्था का प्रतीक माना जाता है. इस स्टोरी में हम आपको बताएंगे कि इस त्योहार को किस-किस नाम से जाना जाता है.
भारत में इन नामों से पहचानी जाती है बकरीद

2 / 9
भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में इस त्योहार को आमतौर पर बकरीद, बकरा ईद या ईद-उल-अजहा कहा जाता है. हालांकि कई देशों में इसकी पहचान और नाम स्थानीय भाषा और संस्कृति के अनुसार अलग-अलग हैं.
तुर्की और यूरोप में बकरीद के अलग नाम

3 / 9
तुर्की में बकरीद को 'कुर्बान बयरामी' कहा जाता है, जिसका मतलब कुर्बानी का त्योहार होता है. वहीं बोस्निया, अल्बानिया और बुल्गारिया जैसे देशों में इसे 'कुर्बान बजरम' नाम से जाना जाता है.
अरब और अफ्रीकी देशों में क्या कहते हैं

4 / 9
मोरक्को, अल्जीरिया, मिस्र और लीबिया जैसे देशों में बकरीद को 'ईद-अल-कबीर' कहा जाता है. पश्चिमी अफ्रीका और नाइजीरिया में यह पर्व 'बब्बर सल्लाह' नाम से काफी लोकप्रिय माना जाता है.
इंडोनेशिया और एशियाई देशों की खास पहचान

5 / 9
दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया में बकरीद को 'इदुल अजहा' और 'लेबारान हाजी' कहा जाता है. वहीं अफगानिस्तान में इसे 'लोय अख्तर' और ईरान में 'ईद-ए-कुर्बान' कहा जाता है.
यूरोपीय देशों में ऐसे मनाई जाती है बकरीद

6 / 9
जर्मनी में बकरीद को 'ओपफरफेस्ट' और नीदरलैंड में 'ओफरफेस्ट' कहा जाता है.
सोमालिया और कजाकिस्तान में भी अलग नाम

7 / 9
सोमालिया में इस पर्व को 'सीदवयनी' कहा जाता है, जबकि कजाकिस्तान में 'कुर्बान ऐत' नाम से जाना जाता है. कुर्दिश क्षेत्रों में इसे 'जेना कुर्बाने' और बर्बर भाषा में 'तफास्का तमोक्कार्त' कहा जाता है.
आखिर क्यों मनाई जाती है बकरीद

8 / 9
पैगंबर इब्राहिम की कुर्बानी, त्याग और अल्लाह के प्रति अटूट समर्पण की याद में दुनियाभर में बकरीद मनाई जाती है. इस्लामी मान्यता के अनुसार, अल्लाह ने उनकी आस्था और भक्ति की परीक्षा लेने के लिए उनसे उनकी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी मांगी थी. पैगंबर इब्राहिम ने बिना किसी संकोच के अपने बेटे की कुर्बानी देने की तैयारी कर ली थी. जैसे ही पैगंबर इब्राहिम ने बेटे पैगंबर इस्माइल को जबा करने शुरू किया, तभी उनकी सच्ची निष्ठा और विश्वास को देखकर अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक दुंबे को कुर्बानी के लिए भेज दिया और उनकी परीक्षा पूरी मानी. तभी से ईद-उल-अजहा को कुर्बानी, त्याग, इंसानियत और अल्लाह के प्रति समर्पण के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है.
कुर्बानी और इंसानियत का संदेश देता है त्योहार

9 / 9
बकरीद सिर्फ कुर्बानी का त्योहार नहीं बल्कि इंसानियत, त्याग और जरूरतमंदों की मदद का भी संदेश देता है. दुनिया के अलग-अलग देशों में इसके नाम भले बदल जाते हों, लेकिन इसकी भावना हर जगह एक जैसी रहती है. कुर्बानी के जानवर के मास के तीन हिस्से करना जरूरी है, जिसमें एक गरीबों का, दूसरी उन रिश्तेदारों का जिनके यहां कुर्बानी नहीं हुई है और तीसरा खुद के लिए. तीनों हिस्सों का बराबर होना जरूरी है. (Image: Pexels)