bakrid special: भारत में बकरीद के मौके पर कुर्बानी को लेकर अक्सर चर्चाएं तेज हो जाती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस त्योहार पर देश में कितने बकरों की बिक्री और कुर्बानी होती है? वैसे तो सरकार इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं करती, लेकिन विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुमान बताते हैं कि यह बाजार बेहद विशाल है. जानें करोड़ों के इस बकरा बाजार और देश की मीट इंडस्ट्री से जुड़े हैरान करने वाले आंकड़े.
करीब 20 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम आबादी

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देश में करीब 20 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम आबादी है. अलग-अलग रिपोर्ट्स का दावा है कि करीब 8 से 10 फीसदी मुस्लिम परिवार बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी देते हैं. इस अनुमान के मुताबिक, बकरीद के दौरान देश भर में लगभग 2 करोड़ बकरों की बिक्री और कुर्बानी हो सकती है.
सिर्फ लखनऊ में करीब 400 करोड़ रुपये का कारोबार

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कारोबार के लिहाज से देखें तो सिर्फ लखनऊ में ही पिछले साल बकरीद पर पशुओं की खरीद-फरोख्त से करीब 400 करोड़ रुपये का कारोबार होने का दावा किया गया था, जहां लोगों ने 15 हजार से लेकर 5 लाख रुपये तक के बकरे खरीदे. वहीं, एशिया के सबसे बड़े मुंबई की देवनार मंडी में एक हफ्ते के भीतर ही 1.68 लाख से ज्यादा बकरे और भेड़ें बिक गए थे.
तेजी से बढ़ रही है देश की मीट इंडस्ट्री

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'बेसिक एनिमल हसबैंड्री स्टैटिस्टिक्स 2025' की रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा मीट उत्पादक देश है. साल 2024-25 में देश का कुल मीट उत्पादन बढ़कर 10.50 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो साल 2018-19 में 8.11 मिलियन टन था. इसी तरह देश में प्रति व्यक्ति मीट की उपलब्धता भी 6.15 किलो से बढ़कर 7.50 किलो प्रति वर्ष हो गई है.
सबसे बड़ी हिस्सेदारी पोल्ट्री यानी चिकन की

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कुल मीट उत्पादन में सबसे बड़ी हिस्सेदारी पोल्ट्री यानी चिकन (49%) की है. इसके बाद भैंस का मीट 19%, बकरे का मीट 15%, भेड़ का मीट 11%, सुअर का मीट 4% और गाय-बैल का मीट 2% स्थान रखता है. राज्यों की बात करें तो कुल मीट उत्पादन में 12.46% हिस्सेदारी के साथ पश्चिम बंगाल पहले नंबर पर है, जबकि उत्तर प्रदेश (12.20%) दूसरे और महाराष्ट्र (11.57%) तीसरे पायदान पर आता है. इन आंकड़ों से साफ है कि देश में मीट की मांग और इसका बाजार दोनों साल-दर-साल तेजी से बढ़ रहे हैं.