आईपीएल में हाल की कामयाबी के बावजूद, गिल का टी20 इंटरनेशल सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा है. भारतीय टीम में संजू सैमसन से पहले उन्हें मौका दिए जाने के बाद, उनसे उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं. हालांकि, लगातार रन न बना पाने और कम स्ट्राइक रेट की वजह से यह सवाल उठने लगे थे कि क्या उन्हें क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट में रेगुलर जगह मिलनी चाहिए.

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भारत के विदेशी दौरों और उसके बाद घरेलू सीरीज के दौरान यह आलोचना और भी तेज हो गई. गिल मिले मौकों को बड़े स्कोर में बदलने में नाकाम रहे, जबकि सैमसन एक अग्रेसिव ओपनर के तौर पर अपनी दावेदारी मजबूत करते रहे. आखिरकार सिलेक्टर्स ने आगे बढ़ने का फैसला किया और गिल को टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए सिलेक्ट नहीं किया.

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इस आईपीएल सीजन ने निश्चित तौर पर उनकी साख को फिर से बहाल किया है. गुजरात के कप्तान ने 48 से ज्यादा की औसत से 722 रन बनाए हैं, जबकि उनका स्ट्राइक रेट 163 से ज्यादा रहा है. क्वालिफायर-2 में सिर्फ 53 गेंदों पर बनाए गए उनके शानदार 104 रनों ने उनकी क्लास और बेहतरीन गेंदबाजी आक्रमण पर हावी होने की उनकी क्षमता को दिखाया.

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हालाकि मॉडर्न टी20 क्रिकेट में सिर्फ कंसिस्टेंसी से काम नहीं चलता. कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब टॉप-ऑर्डर के बल्लेबाजों के लिए स्ट्राइक रेट और छक्के लगाने की क्षमता ही सबसे अहम पैमाने बन गए हैं. जहां गिल ने काफी रन बनाए हैं, वहीं कुछ कॉम्पिटिटर्स पूरे सीजन में उनसे भी ज्यादा विस्फोटक रहे हैं.

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ओपनिंग स्लॉट के लिए मुकाबला अभी भी काफी कड़ा है. अभिषेक शर्मा भारत के सबसे विस्फोटक बल्लेबाजों में से एक बने हुए हैं, जबकि संजू सैमसन ने मैच विनिंग इंटरनेशनल परफॉर्मेंस की वजह से अपनी जगह पक्की कर ली है. इस मुकाबले को और भी कड़ा बना रहे हैं युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी, जिन्होंने आईपीएल 2026 में असाधारण आंकड़े पेश किए हैं.

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हालांकि गिल के टैलेंट पर कोई सवाल नहीं है, फिर भी सिलेक्टर्स शायद उन खिलाड़ियों को प्रायोरिटी देंगे जो ज्यादा आक्रामक रवैया अपनाते हैं. उनके हाल के प्रदर्शन ने उनकी दावेदारी को मजबूत किया है, लेकिन अवेलेबल कॉम्पिटिशन को देखते हुए, भारत के मौजूदा T20I टॉप-ऑर्डर में जगह बनाना अभी भी एक मुश्किल चुनौती बनी हुई है.