उनकी ये कामयाबी दुनिया के सबसे मजबूत चेस प्लेयर्स में से एक के खिलाफ मिली. इस कॉम्पिटिशन में वर्ल्ड नंबर-1 मैग्नस कार्लसन, मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन डी गुकेश, अलीरेजा फिरोजा, वेस्ली सो और विंसेंट कीमर जैसे टॉप नाम शामिल थे, जिससे ये अचीवमेंट और भी काबिल ए तारीफ हो गई.

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प्रज्ञानानंदा इवेंट के आखिरी स्टेज में मुश्किल बीच के फेज के बाद लीडर्स से पीछे चल रहे थे. हालांकि, उन्होंने कई शानदार परफॉर्मेंस के साथ जवाब दिया जिसने उनकी किस्मत बदल दी और उन्हें चैंपियनशिप की रेस में वापस ला दिया.

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उनके टाइटल जीतने के सिलसिले में एक अहम वजह टॉप अपोनेंट्स पर लगातार क्लासिकल विक्ट्रीज थी. फिरोजा, कार्लसन और गुकेश के खिलाफ जीत ने उन्हें मोमेंटम हासिल करने और फाइनल राउंड से पहले रेस में आगे बढ़ने में मदद की.

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गुकेश के खिलाफ राउंड-9 में उनकी जीत खास तौर पर जरूरी साबित हुई, जिससे वो लीडर्स के करीब बने रहे. आखिरी दिन, प्रज्ञानानंदा वेस्ली सो और फिरोजा के साथ पहली पोजीशन के लिए एक टेंशन वाली लड़ाई में शामिल थे.

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इस बीच, वेस्ली सो ने फिरोजा को आर्मागेडन गेम में हराकर अपनी उम्मीदें जिंदा रखीं, लेकिन कीमर पर प्रज्ञानानंदा की जीत ने ये एनश्योर कर दिया कि वह आगे रहें. कार्लसन ने भी टूर्नामेंट का अंत जोरदार तरीके से किया, गुकेश को हराया और फाइनल स्टैंडिंग में चौथी पोजीश पर पहुंच गए.

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प्रज्ञानानंदा के कैंपेन की एक और खास बात कार्लसन पर उनका दबदबा था. उन्होंने इवेंट के दौरान क्लासिकल गेम्स में नॉर्वे के स्टार को दो बार हराया, यह एक बहुत कम होने वाली बात थी जो पहले सिर्फ विश्वनाथन आनंद ने एक ही टूर्नामेंट में हासिल की थी. यह टाइटल भारत के शतरंज खिलाड़ियों की नई पीढ़ी के सबसे चमकते सितारों में से एक के तौर पर प्रज्ञानानंदा की रेप्युटेशन को और मजबूत करता है.