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ब्रिटेन के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले अंपायर के तौर पर मशहूर डिब ने 1,000 से ज्यादा मैचों में अंपायरिंग की है. उनके जुनून ने उन्हें विदेशों तक पहुंचाया है; वो छुट्टियों पर भी अपने अंपायरिंग का सामान साथ ले जाते थे और ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और बारबाडोस जैसे देशों में मैचों को सुपरवाइज करते थे.

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2 बार कंधे की सर्जरी और एक बार नी रिप्लेसमेंट सर्जरी होने के बावजूद, उन्होंने क्रिकेट से दूर हटने से मना कर दिया. हालांकि, अब चलने-फिरने में थोड़ी दिक्कत होने की वजह से, वो यंग अंपायर्स को सलाह देकर और अगली पीढ़ी के साथ अपने एक्सपीरिएंस को शेयर करके अपना योगदान दे रहे हैं.

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कीथ डिब ने 'द मिरर' को बताया, 'इन सालों में इतने सारे लोगों से मिलना बहुत शानदार रहा, अब मैं उतना फुर्तीला नहीं रहा, जितना पहले था. अब मैं सलाह देने का काम कर रहा हूं, क्योंकि मेरे घुटने का एक और ऑपरेशन हुआ है और मैं थोड़ा धीरे चलता हूं. इसलिए लीग वालों ने कहा, 'हम नहीं चाहते कि आपको चोट लगे, इसलिए बेहतर होगा कि आप मेंटॉर का काम करें.' तो अब मैं लोगों को खेल के दांव-पेच सिखाऊंगा.'

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कीथ डिब लोगों से मिलने और हेडिंग्ले जैसे मैदानों पर दोबारा जाने के अपने तजुर्बे को बड़े प्यार से याद करते हैं; इन मैदानों पर अक्सर उनकी मुलाकात पुराने जान-पहचान वालों से हो जाती है. उन्होंने इन पलों को बेहद खास बताया और इस बात पर जोर दिया कि क्रिकेट ने उन्हें जिंदगी भर के रिश्ते बनाने में किस तरह मदद की है.

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क्रिकेट को लेकर उनका प्यार तब जागा, जब वो 13 साल के थे और नॉर्थ यॉर्कशायर के एक लोकल क्लब में शामिल हुए थे. उन्हें वो पल भी याद है, जब वे चुपके से हेडिंग्ले के मैदान में घुस गए थे, ताकि सर डॉन ब्रैडमैन को 173 रनों की नाबाद पारी खेलते हुए देख सकें; ये वो पल था, जिसने क्रिकेट के प्रति उनके जुनून को और भी गहरा कर दिया.

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हालांकि उन्हें निजी तौर पर कई दुख झेलने पड़े हैं, जिनमें 59 साल की शादी के बाद उनकी पत्नी का गुजर जाना भी शामिल है, फिर भी डिब जेंटलमैन गेम को लेकर पूरी तरह कमिटेड हैं. अपनी इस पूरी जर्नी पर नजर डालते हुए, वो कभी-कभार होने वाले विवादों को स्वीकार करते हैं, लेकिन इस बात पर जोर देते हैं कि क्रिकेट आज भी खेल-भावना के साथ ही खेला जाता है. साथ ही, वो ये भी कहते हैं कि वो वुमेंस क्रिकेट को पूरी तरह सपोर्ट करते हैं.