आकिब नबी ने इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज के तौर पर अपना सफर खत्म किया; उन्होंने 10 मैचों में 60 विकेट लिए और उनका औसत 12.56 का बेहतरीन रहा. उनके इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत जम्मू-कश्मीर की टीम पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीतने में कामयाब रही. 29 साल के इस तेज गेंदबाज को पूरे टूर्नामेंट के दौरान लगातार मैच जिताने वाले प्रदर्शन के लिए 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' चुना गया.

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इस दाएं हाथ के तेज गेंदबाज ने नॉकआउट मुकाबलों में कई यादगार स्पेल डाले. क्वार्टरफाइनल में मध्य प्रदेश के खिलाफ उन्होंने 12-110 का फिगर दिया, और उसके बाद सेमीफाइनल में बंगाल के खिलाफ 9-123 का स्कोर दर्ज किया. फाइनल में कर्नाटक के खिलाफ आकिब नबी ने एक बार फिर अपनी छाप छोड़ी और हुबली में पहली पारी में 5-54 का स्कोर बनाया.

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दिलीप वेंगसरकर ने 'टीओई' के जरिए सिलेक्टर्स के इस फैसले पर निराशा जाहिर की और सवाल उठाया कि ऐसे शानदार प्रदर्शन को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है. पूर्व चीफ सिलेक्टर्स के मुताबिक, घरेलू क्रिकेट में लगातार खुद को साबित करने के बाद, नबी कई दूसरे खिलाड़ियों के मुकाबले टीम में जगह पाने के ज्यादा हकदार थे. उन्होंने ये भी चेतावनी दी कि रणजी ट्रॉफी के बेहतरीन प्रदर्शनों को नजरअंदाज करने से पूरे देश के युवा क्रिकेटरों को गलत संदेश जाता है.

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भारत के पूर्व कप्तान ने आगे ये तर्क दिया कि गेंदबाजी की गति के मुकाबले विकेट लेने की क्षमता ज्यादा मायने रखनी चाहिए. खबरों के मुताबिक, नबी को इसलिए नजरअंदाज किया गया क्योंकि वह बहुत तेज गति से गेंदबाजी नहीं करते, लेकिन वेंगसरकर ने इस तर्क को पूरी तरह से खारिज कर दिया. उन्होंने जोर देकर कहा कि गेंदबाज की निरंतरता और विकेट लेने की क्षमता ही सिलेक्शन का मुख्य आधार होना चाहिए.

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चूंकि अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच के लिए जसप्रीत बुमराह को आराम दिया गया है, इसलिए वेंगसरकर का मानना था कि ये नबी को इंटरनेशल लेवल पर मौका देने का सबसे सही समय था. भारत के पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान और मुंबई के पूर्व कप्तान शिशिर हट्टंगड़ी ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए और सार्वजनिक तौर पर नबी का समर्थन किया.

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इस बीच चयनकर्ताओं ने इसके बजाय पंजाब के तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़ को टेस्ट और वनडे, दोनों टीमों में पहली बार शामिल किया है. सिलेक्शन कमेटी के करीबी सूत्रों ने 'इंडिया ए' के लिए बराड़ के प्रदर्शन और पंजाब के लिए उनके शानदार विजय हजारे ट्रॉफी सीजन का जिक्र करते हुए इस फैसले का बचाव किया.