अगर ऐसा होता तो… क्रिकेट के ‘किंग’ नहीं होते विराट? बचपन के कोच ने बताई कोहली के करियर की अनकही सच्चाई!
Rajkumar Sharma On Virat Kohli: टेस्ट और टी20 इंटरनेशनल से रिटायर होने के बावजूद विराट कोहली आज वर्ल्ड क्रिकेट के सबसे बड़े सुपरस्टार हैं. ये उनकी ही बदौलत है कि आज आरसीबी आईपीएल की ऐसी टीम है जिसका फैन बेस सबसे ज्यादा है. हालांकि इस स्टार प्लेयर ने बचपन से ही काफी मेहनत की है, जिसके गवाह उनके चाइल्डहुड कोच राजकुमार शर्मा रहे हैं.

विराट कोहली 37 साल के होने के बावजूद भारतीय क्रिकेट में फिटनेस का बेंचमार्क तय करना जारी रखे हुए हैं. जहां कई युवा खिलाड़ी टीम इंडिया के लिए जबरदस्त प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं कोहली का डेडिकेशन, डिसिप्लिन और जोश अपने करियर के इस पड़ाव पर भी जबरदस्त बना हुआ है.
2 / 6ये स्टार बल्लेबाज फिलहाल भारत के लिए सिर्फ वनडे क्रिकेट खेलते हैं, लेकिन बेहतरीन फिटनेस बनाए रखने को लेकर उनके डेडिकेशन ने फैंस और एक्सपर्ट्स, दोनों को ही इम्प्रेस किया है. IPL 2026 के मौजूदा सीजन में, कोहली अब तक 550 से ज्यादा रन बना चुके हैं, और साथ ही फील्डिंग और विकेटों के बीच दौड़ते वक्त भी जबरदस्त एनर्जी का प्रदर्शन कर रहे हैं.
3 / 6विराट कोहली ने अक्सर अपने क्रिकेट करियर में आए बदलाव का क्रेडिट अपनी फिटनेस को दिया है. उनके बचपन के कोच राजकुमार शर्मा ने हाल ही में एक यू-ट्यूब चैनल पर हुई एक बातचीत के दौरान इस बल्लेबाज की स्ट्रिक्ट लाइफस्टाइल और डाइट की आदत की आदतों के बारे में कुछ दिलचस्प बातें बताईं. उन्होंने कहा, 'मुझे तो ये भी नहीं पता कि उसने कितने सालों से चीनी नहीं खाई है'
4 / 6राजकुमार शर्मा ने 2008 में आरसीबी में शामिल होने के बाद आईपीएल में विराट कोहली के शुरुआती दिनों के बारे में भी खुलकर बात की. उनके मुताबिक, उस वक्त यंग क्रिकेटर के लिए फ्रेंचाइजी के आस-पास के माहौल में मौजूद भटकावों और पार्टियों के कल्चर से दूर रहना शुरू में काफी मुश्किल था.
5 / 6राजकुमार शर्मा ने कहा, 'ये उसकी जिंदगी का सबसे अहम दौर था. जब किस्मत से उसे आरसीबी के लिए चुना गया, तो आप जानते ही हैं कि आरसीबी का कल्चर कैसा था - पार्टियों का कल्चर. और मैं इसके लिए उसे बिल्कुल भी दोष नहीं देता. 17 या 18 साल का कोई बच्चा उस पार्टी कल्चर से बच ही नहीं सकता. उन मीटिंग्स और पार्टियों में जाना हर किसी के लिए जरूरी होता था. वहां ऐसा कल्चर था कि आपको पार्टियों में जाना ही पड़ता था. तो फिर 17-18 साल का कोई बच्चा उस पार्टी कल्चर का विरोध कैसे कर सकता था?'
6 / 6बचपन के कोच ने आगे कहा, 'उस वक्त, मुझे उसके साथ सचमुच बहुत मेहनत करनी पड़ी थी. मुझे उसे कई बार डांटना भी पड़ा. मैंने कई ऐसी चीजें कीं जिनके बारे में मैं यहां खुलकर नहीं बता सकता. ये सब उसे कंट्रोल करने के लिए था - मतलब, उसे पूरी तरह से अपने काबू में रखने के लिए नहीं, बल्कि उसे सही तरीके से संभालने के लिए. मैं उसे बिल्कुल भी दोष नहीं देता. जब आप इतने कम उम्र के होते हैं और आपको हर रोज ऐसी पार्टियों में जाना पड़ता है, तो आप खुद को रोक नहीं पाते. लेकिन वहां मेरा रोल ये था कि मैंने उसे सही तरीके से संभाला. भगवान की कृपा से, उसने मेरी बात समझी, उसे ये समझ आ गया कि उसे क्या करना है, और उसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.'