अंतरिक्ष से भारत पर नजर रख रहा पाकिस्तान! 16 महीनों में चुपचाप लॉन्च किए 6 सैटेलाइट; क्या है दुश्मन की नई चाल?

पाकिस्तान 1947 के बाद से ही भारत के खिलाफ तरह-तरह की साजिशें रचता आ रहा है और हर बार उसे मुंह की खानी पड़ी है. जमीन पर पिटने के बाद अब पाकिस्तान की मंशा अंतरिक्ष में भारत के हाथों मात खाने की है. शायद यही वजह है कि पिछले 16 महीनों में उसने आधे दर्जन सैटेलाइट लॉन्च किए हैं. ऐसी भी रिपोर्ट्स है कि इन सैटेलाइट का इस्तेमाल भारत की निगरानी के लिए किया जा रहा है.

Pakistan earth observation satellites
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पाकिस्तान 1947 के बाद से ही भारत के खिलाफ तरह-तरह की साजिशें रचता आ रहा है और हर बार उसे मुंह की खानी पड़ी है. जमीन पर पिटने के बाद अब पाकिस्तान की मंशा अंतरिक्ष में भारत के हाथों मात खाने की है. शायद यही वजह है कि पिछले 16 महीनों में उसने आधे दर्जन सैटेलाइट लॉन्च किए हैं. ऐसी भी रिपोर्ट्स है कि इन सैटेलाइट का इस्तेमाल भारत की निगरानी के लिए किया जा रहा है.

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पाकिस्तान की स्पेस नीति में तेजी

पाकिस्तान की स्पेस नीति में तेजी2 / 7

इन छह लॉन्च का पैटर्न परंपरागत पैमाने से अलग है, पाकिस्तान की स्पेस नीति में अचानक गति आई है. SUPARCO के रोस्टर में दशकों में सीमित उपग्रह रहे हैं, पर हाल के 16 महीनों में किए गए लगातार प्रक्षेपण इसे तेजी से बदल रहे हैं इस बदलाव के पीछे चीन के साथ गहरा सहयोग और प्रौद्योगिकी साझा करने की सुविधा प्रमुख कारण दिखाई देती है.

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क्या-क्या कर सकती हैं पाकिस्तान की सैटेलाइट्स

क्या-क्या कर सकती हैं पाकिस्तान की सैटेलाइट्स3 / 7

सैटेलाइट्स की क्षमताएं सिर्फ फोटो लेने तक सीमित नहीं हैं, इन्हें लगातार निगरानी और एनालसिस के लिए डिजाइन किए गए हैं. हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग, परिवर्तन-डिटेक्शन और छुपे हुए ऑब्जेक्ट पहचानने वाली प्रणालियां मिलकर किसी क्षेत्र की गतिविधियों का लगातार रिकॉर्ड तैयार कर सकती हैं. ऐसी व्यवस्था से सैन्य तैनाती, आधारभूत ढांचे में बदलाव और असामान्य गतिविधियां जल्दी हाइलाइट हो सकेंगी.

किस लिए डिजाइन की गई है सैटेलाइट?

किस लिए डिजाइन की गई है सैटेलाइट?4 / 7

हाइपरस्पेक्ट्रल प्लैटफ़ॉर्म HS-1 जैसे सैटेलाइट्स किसी खास चीज को पहचान में सक्षम हैं, जो पारंपरिक ऑप्टिकल सेंसर से छूटे हुए संकेत भी पकड़ लेते हैं. यह तकनीक मिट्टी, धातु और अन्य सतहों के रासायनिक या भौतिक गुणों के आधार पर अंतर कर सकती है. जिससे छुपे हुए उपकरण या कवर किए गए ठिकानों की पहचान आसान हो सकती है.

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AI का भी इस्तेमाल

AI का भी इस्तेमाल5 / 7

PRSC-EO2 और PRSC-EO3 जैसे नए उपग्रहों में उन्नत इमेजिंग के साथ-साथ AI-सहायता प्राप्त डेटा प्रोसेसिंग सामर्थ्य भी शामिल है. एनालसिस से संकेत मिलता है कि कुछ उपग्रहों को दक्षिण एशिया पर बार-बार निगरानी के लिहाज से अनुकूल कक्षा में तैनात किया गया है. ऐसे ऑर्बिट्स से जम्मू-कश्मीर सहित उत्तरी भारत के ऊपर कई बार गुजरने की क्षमता मिलती है, जिससे रोजाना निगरानी संभव हो जाती है.

चीन ने पाकिस्तान से शेयर की तकनीक

चीन ने पाकिस्तान से शेयर की तकनीक6 / 7

चीन ने न केवल प्रक्षेपण सुविधा दी बल्कि डिजाइन, सेंसर्स और डाटा-शेयरिंग में भी सहयोग किया है. यह साझेदारी केवल रॉकेट तक सीमित नहीं दिखती. चीन के Yaogan और Gaofen जैसे नेटवर्क के साथ तालमेल से इस निगरानी आर्किचेक्टर की प्रभावशीलता और बढ़ सकती है.

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भारत के लिए बड़ी चुनौती

भारत के लिए बड़ी चुनौती7 / 7

भारत के लिए यह स्थिति समय पर चुनौती पेश करती है, क्योंकि इसी दौरान ISRO को कुछ रणनीतिक उपग्रह मिशनों में झटके भी झेलने पड़े हैं. रक्षा नियोजकों का दृष्टिकोण बदल रहा है, भविष्य के संघर्ष में अंतरिक्ष से मिलने वाली सूचना का नियंत्रण जमीन-हथियारों जितना ही निर्णायक होगा.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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