सुलझ गया बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य? द्वीप के नीचे वैज्ञानिकों को मिली अजीब सी चौंका देने वाली संरचना

दशकों से वैज्ञानिकों को बरमूडा द्वीप का भूगर्भीय रहस्य परेशान कर रहा था. अटलांटिक महासागर के बीच यह द्वीप अपने आसपास के समुद्र तल से करीब 1600 फीट ऊपर है, जबकि इसके ज्वालामुखी 3 करोड़ साल से अधिक समय पहले शांत हो चुके हैं. अब अमेरिकी वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस पहेली का समाधान ढूंढ लिया है, जो द्वीप के ठीक नीचे छिपी एक अनोखी संरचना से जुड़ा है.

Bermuda Triangle mystery
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दशकों से वैज्ञानिकों को बरमूडा द्वीप का भूगर्भीय रहस्य परेशान कर रहा था. अटलांटिक महासागर के बीच यह द्वीप अपने आसपास के समुद्र तल से करीब 1600 फीट ऊपर है, जबकि इसके ज्वालामुखी 3 करोड़ साल से अधिक समय पहले शांत हो चुके हैं. अब अमेरिकी वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस पहेली का समाधान ढूंढ लिया है, जो द्वीप के ठीक नीचे छिपी एक अनोखी संरचना से जुड़ा है.  

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सामान्य मॉडल से अलग बरमूडा

सामान्य मॉडल से अलग बरमूडा2 / 9

बरमूडा को लेकर वैज्ञानिकों की उलझन लंबे समय से बनी हुई थी. आमतौर पर हवाई जैसे द्वीप समूह मेंटल प्ल्यूम यानी पृथ्वी की गहराई से उठने वाले गर्म चट्टानी स्तंभ पर बनते हैं, लेकिन बरमूडा इस पैटर्न में फिट नहीं होता था.

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शोधकर्ताओं ने की खोज

शोधकर्ताओं ने की खोज3 / 9

कार्नेगी साइंस और येल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने भूकंपी तरंगों के जरिए अध्ययन किया. उन्होंने पाया कि यहां कोई सक्रिय प्ल्यूम नहीं है, फिर भी द्वीप ऊंचा बना हुआ है. यह खोज बताती है कि बरमूडा की ऊंचाई किसी और अनोखी भूगर्भीय प्रक्रिया का नतीजा है.

12 मील मोटी हल्की चट्टान की परत

12 मील मोटी हल्की चट्टान की परत4 / 9

शोधकर्ताओं विलियम फ्रेजर और जेफरी पार्क ने भूकंपों से उत्पन्न तरंगों का विश्लेषण किया. उन्होंने द्वीप के नीचे महासागरीय क्रस्ट के ठीक नीचे 12 मील से अधिक मोटी चट्टान की परत का पता लगाया. यह परत आसपास के मेंटल की तुलना में काफी हल्की है, जो इसे एक तरह का राफ्ट बनाती है और समुद्र तल को ऊपर उठाए रखती है. ऐसी संरचना पृथ्वी पर कहीं और देखने को नहीं मिली है.

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अंडरप्लेटिंग की खोज

अंडरप्लेटिंग की खोज5 / 9

वैज्ञानिकों ने इस परत को अंडरप्लेटिंग नाम दिया है. यह तब बनी जब लाखों साल पहले कार्बन युक्त पिघला हुआ मेंटल पदार्थ क्रस्ट के आधार में घुस गया और ठंडा होकर जम गया.

क्या है ये प्रक्रिया?

क्या है ये प्रक्रिया?6 / 9

इस प्रक्रिया ने द्वीप को एक मजबूत आधार प्रदान किया, जो सामान्य ज्वालामुखी द्वीपों से बिल्कुल अलग है. फ्रेजर के अनुसार यह खोज पारंपरिक मेंटल प्ल्यूम मॉडल की सीमाओं को उजागर करती है.

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पैंजिया महाद्वीप से जुड़ा रहस्य

पैंजिया महाद्वीप से जुड़ा रहस्य7 / 9

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह हल्का पदार्थ पृथ्वी की गहराई से सैकड़ों लाख साल पहले आया, शायद पैंजिया महाद्वीप के निर्माण के समय. यह सामग्री बाद में बरमूडा के ज्वालामुखी युग में ऊपर आई और क्रस्ट के नीचे जम गई. इससे पता चलता है कि पृथ्वी के मेंटल में कई ऐसी प्रक्रियाएं हैं जिन्हें अभी पूरी तरह समझा नहीं गया है.

भूकंपी तरंगों से खुला राज

भूकंपी तरंगों से खुला राज8 / 9

वैश्विक भूकंपों की तरंगों का अध्ययन करके ही वैज्ञानिक बरमूडा के 20 मील गहरे अंदर तक की तस्वीर बना सके. तरंगों की गति में बदलाव से चट्टानों की घनत्व और संरचना का पता चला. इस तकनीक ने द्वीप के नीचे छिपी अनोखी परत को उजागर किया जो पहले किसी की नजर में नहीं आई थी.

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अनोखी खोज

अनोखी खोज9 / 9

विलियम फ्रेजर ने कहा, 'बरमूडा अध्ययन के लिए रोचक जगह है क्योंकि इसके कई भूगर्भीय लक्षण मेंटल प्ल्यूम मॉडल में फिट नहीं बैठते.' उन्होंने कहा कि यहां मोटी अंडरप्लेटिंग देखने को मिली है, जो ज्यादातर प्ल्यूम वाले क्षेत्रों में नहीं पाई जाती. यह खोज बताती है कि पृथ्वी के अंदर और भी जटिल संवहनी प्रक्रियाएं सक्रिय हैं.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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