हनुमान जी को देखते ही दिल हार बैठी थी रावण की जलपरी पुत्री, पिता के विरुद्ध जाकर रामसेतु बनवाने में की थी मदद

Suvannamaccha & Hanuman Ji Story: हनुमान जी की शक्ति, महिमा, राम भक्ति और चरित्र आदि से जुड़ी विभिन्न कथाएं प्रचलित हैं, जिन सभी का अपना महत्व है. लेकिन आज यहां पर आपको रावण की उस जलपरी पुत्री के बारे में जानने को मिलेगा, जिसे पहले ही नजर में हनुमान जी से प्रेम हो गया था.

Suvannamaccha & Hanuman Ji Story
1 / 6

वाल्मीकि रामायण, एक प्राचीन संस्कृत महाकाव्य है, जिसकी रचना महर्षि वाल्मीकि ने की थी. इसमें राम जी के अलावा उनके परम भक्त हनुमान जी की शक्ति, पराक्रम और अन्य खूबियों का वर्णन किया गया है. हालांकि, वाल्मीकि रामायण के अलावा कई महान शख्सियतों ने भी रामायण लिखी है. उन्हीं में से एक थाईलैंड और कंबोडिया की रामायण है. इसी रामायण में रावण की जलपरी पुत्री का वर्णन किया गया है, जिसके बारे में हम आपको यहां बताएंगे. (Image Credit- AI Gemini)

विज्ञापन

आधा मनुष्य और आधा मछली का था शरीर

आधा मनुष्य और आधा मछली का था शरीर2 / 6

थाईलैंड और कंबोडिया की रामायण के अनुसार, रावण की एक पुत्री भी थी, जिसका नाम सुवर्णमछा था. सुवर्णमछा का शरीर आधा मनुष्य और आधा मछली का था, इसी वजह से कई लोग इसे जलपरी भी कहते थे. सुवर्णमछा देखने में बहुत सुंदर थीं. बता दें कि सुवर्णमछा का शरीर सोने का था, जिसके कारण उसे स्वर्णमछा भी कहा जाता था. (Image Credit- AI Gemini)

विज्ञापन

सुवर्णमत्‍स्‍य को पहली नजर में हो गया था हनुमान जी से प्रेम

सुवर्णमत्‍स्‍य को पहली नजर में हो गया था हनुमान जी से प्रेम3 / 6

थाईलैंड और कंबोडिया की रामायण के अनुसार, जब हनुमान जी की वानर सेना रामसेतु का पुल बना रही थी तो समुद्र में से कुछ पत्थर गायब हो रहे थे. हनुमान जी की इस पर नजर गई और उन्होंने समुद्र के अंदर जाकर देखा कि पानी के अंदर रहने वाले लोग पत्‍थर और चट्टानें को हटा रहे हैं, जिनको एक मत्‍स्‍य कन्‍या निर्देश दे रही है. इस बीच सुवर्णमछा ने हनुमान जी को देखा और अपना दिल उन पर हार बैठी. हनुमान जी सुवर्णमछा के पास गए और पूछा कि आप कौन हैं, इसका जवाब देते हुए सुवर्णमछा ने बताया कि वो रावण की बेटी है. (Image Credit- AI Gemini)

सुवर्णमत्‍स्‍य को हनुमान जी ने समझाया

सुवर्णमत्‍स्‍य को हनुमान जी ने समझाया4 / 6

हनुमान जी को जब पता चला कि सुवर्णमछा रावण की बेटी है तो उन्होंने उसे समझाया कि वो गलत कर रही है. सुवर्णमछा हनुमान जी से प्रभावित हो गई थी, जिसके कारण उसने उन्हें पत्थर दे दिए. साथ ही रामसेतु बनवाने में मदद की. (Image Credit- Freepik)

विज्ञापन

सुवर्णमत्‍स्‍य की देवी के रूप में भी होती है पूजा

सुवर्णमत्‍स्‍य की देवी के रूप में भी होती है पूजा5 / 6

बता दें कि श्रीलंका, इंडोनेशिया, बाली, कंबोडिया और थाईलैंड में रावण की पूजा की जाती है. साथ ही उनकी बेटी सुवर्णमत्‍स्‍य को देवी का रूप मानकर पूजा जाता है. विदेशों में सुवर्णमत्‍स्‍य और हनुमान जी के कई चित्र आपको साथ में मिल जाएंगे. बता दें कि कई अन्य रामायण में भी सुवर्णमत्‍स्‍य का वर्णन किया गया है. (Image Credit- Social Media)

सुवर्णमछा की माता कौन थीं?

सुवर्णमछा की माता कौन थीं?6 / 6

बता दें कि कई रामायण में सुवर्णमछा के पिता रावण का तो उल्लेख किया गया है, लेकिन उनकी माता का स्पष्ट रूप से वर्णन नहीं किया गया है. न ही देवी सुवर्णमछा की माता से जुड़ी कथाएं प्रचलित हैं. (Image Credit- Freepik) (डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

विज्ञापन