Mahabharata Story: महाभारत काल में उडुपी के राजा कुरुक्षेत्र युद्ध में शामिल नहीं हुए थे. उन्होंने इस युद्ध में उन्होंने महाभारत युद्ध में तटस्थ रहने का निर्णय लिया था. उन्होंने युद्ध में भाग न लेने के बाद भी अहम भूमिका निभाई थी.
उडुपी के राजा

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उडुपी नरेश यानी उडुपी के राजा ने महाभारत के युद्ध में पांडवों और कौरवों की तरफ से हिस्सा नहीं लिया था. वह इस युद्ध में तटस्थ रहे थे. उडुपी के राजा ने तटस्थ रहकर सेना के भोजन की जिम्मेदारी ली थी.
योद्धाओं के लिए भोजन

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उडुपी के राजा ने युद्ध में हिस्सा न लेकर पांडवों और कौरवों दोनों पक्ष की सेना के लिए भोजन का प्रबंध किया था. वह प्रतिदिन सैनिकों के लिए भोजन तैयार करते थे.
किया था कुशल प्रबंध

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उडुपी के राजा ने सैनिकों के लिए भोजन का कुशल प्रबंधन किया था. वह इस प्रकार भोजन का प्रबंध करते थे कि, अन्न का एक भी दाना बर्बाद नहीं जाता था. रोज युद्ध में कई लोग मारे जाते थे लेकिन वह सिर्फ उतना ही भोजन बनवाते थे जितने की जरूरत होती थी.
भोजन की सटीक मात्रा

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रोजाना कितने सैनिकों के लिए भोजन बनाना है इसकी गणना उडुपी के राजा रहस्यमयी तरीके से करते थे. वह श्रीकृष्ण को रोज मूंगफली खाने को देते थे. इसके बाद वह जिनती मूंगफली खाते इससे मरे हुए सैनिकों की गणना करते थे.
क्या था इसका रहस्य

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उडुपी नरेश के रहस्य के अनुसार, कृष्ण जी जितनी मूंगफली खाते थे. उसके 1000 गुना सैनिक युद्ध में अगले दिन मारे जाते थे. इस प्रकार से उडुपी के राजा भोजन बनाने के लिए गणना करते थे. इससे भोजन न ही कम पड़ता था और न ही व्यर्थ जाता था.
उडुपी के राजा की भूमिका

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उडुपी के राजा ने इस प्रकार से युद्ध में शामिल न होकर भी अहम भूमिका निभाई थी. उन्होंने दोनों पक्ष की सेनाओं के लिए भोजन का प्रबंध किया था. (All Photo Credit- AI) डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.