
1 / 5
दिन-प्रतिदिन प्रेमानंद महाराज के भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है. आज के समय में लोग उनके विचारों और दी गई सलाह को खुशी-खुशी अपना रहे हैं. हाल ही में प्रेमानंद महाराज के एकांतिक वार्तालाप में एक परेशान भक्त पहुंचा, जिसने उनसे सवाल किया कि 'क्या मैं अपनों की शारीरिक पीड़ा यानी बीमारी दूर कर सकता हूं या नहीं?' इस सवाल का प्रेमानंद महाराज ने क्या जवाब दिया, इस बारे में आप यहां पर जानेंगे.
हम अपनों की पीड़ा दूर कर सकते हैं या नहीं?

2 / 5
प्रेमानंद महाराज बताते हैं कि 'अपनों की पीड़ा दूर नहीं की जा सकती है. जो लिख गया है, वो बदला नहीं जा सकता है. उन्होंने पूर्व में कुछ ऐसे कर्म किए होंगे, जिसके कारण वर्तमान में उन्हें शारीरिक पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है.'
अपनों की पीड़ा दूर करने के लिए क्या करें?

3 / 5
इसी के आगे प्रेमानंद महाराज कहते हैं 'यदि सही में आपको अपनों की पीड़ा दूर करनी है तो भगवान से प्रार्थना करें कि बीमार व्यक्ति को दर्द सहने की शक्ति मिले. इससे उन्हें उस पीड़ा से तो हमेशा के लिए छुटकारा नहीं मिलेगा, लेकिन दर्द सहने की शक्ति जरूर मिलेगी.'
प्रेमानंद महाराज कौन हैं?

4 / 5
प्रेमानंद महाराज एक अत्यंत प्रसिद्ध संत हैं, जो अपने विचार, भक्ति और सत्संग के लिए जाने जाते हैं. बता दें कि बाबा राधा वल्लभ संप्रदाय से जुड़े हैं और श्रीजी यानी राधा रानी के परम भक्त हैं. वर्तमान में वह वृंदावन में रहकर सत्संग और एकांतिक वार्तालाप करते हैं.
प्रेमानंद महाराज वृंदावन से बाहर क्यों नहीं जाते हैं?

5 / 5
बता दें कि प्रेमानंद महाराज ने 'क्षेत्र संन्यास' ले रखा है, जिसके अनुसार वो कभी भी व किसी भी कारण से ब्रज की सीमा से बाहर नहीं जा सकते हैं. इसलिए दूर-दूर से लोग उनके दर्शन करने व एकांतिक वार्तालाप में शामिल होने के लिए खुद वृंदावन आते हैं. (All Photo Credit- Social Media) डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.