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नीतीश कुमार का बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल राज्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है. 'सुशासन बाबू' के नाम से मशहूर नीतीश कुमार ने बिहार को उस दौर से बाहर निकाला जब राज्य 'जंगलराज' की छवि से जूझ रहा था. उनके शासनकाल को 'सुशासन' और बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए याद किया जाएगा. उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां और कार्य निम्नलिखित हैं
1. कानून और व्यवस्था में सुधार

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2005 में जब नीतीश कुमार ने सत्ता संभाली, तो उनकी सबसे पहली चुनौती कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाना था. उन्होंने 'स्पीडी ट्रायल' की शुरुआत की, जिससे अपराधियों को तेजी से सजा मिलने लगी. इससे अपराधियों में खौफ पैदा हुआ और आम जनता का पुलिस-प्रशासन पर भरोसा बढ़ा.
2. महिला सशक्तिकरण

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नीतीश कुमार ने महिलाओं को बिहार की राजनीति और समाज का केंद्र बना दिया. छात्राओं को स्कूल भेजने के लिए 'साइकिल योजना' शुरू करना एक क्रांतिकारी कदम साबित हुआ. इसके अलावा, बिहार पंचायती राज में महिलाओं को 50% आरक्षण देने वाला देश का पहला राज्य बना. 2016 में महिलाओं की मांग पर शराबबंदी लागू करना भी उनके इसी विजन का हिस्सा था.
3. सड़क और बिजली का कायाकल्प

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एक समय था जब बिहार की पहचान खराब सड़कों से होती थी. नीतीश कुमार ने सुदूर गांवों को शहरों से जोड़ने के लिए पुलों और सड़कों का जाल बिछाया. बिजली के क्षेत्र में सुधार उनकी बड़ी जीत रही; उन्होंने हर घर तक बिजली पहुँचाने का वादा समय से पहले पूरा कर दिखाया.
4. सामाजिक समावेशन

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नीतीश कुमार ने राजनीति में 'अति पिछड़ा वर्ग' (EBC) और 'महादलित' जैसी नई श्रेणियां बनाईं. उन्होंने उन समुदायों को मुख्यधारा में शामिल किया जो वर्षों से उपेक्षित थे. 'न्याय के साथ विकास' का उनका नारा इसी सामाजिक समावेशन पर आधारित था.
5. सात निश्चय योजना

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विकास को जमीन पर उतारने के लिए उन्होंने 'सात निश्चय' योजना पेश की. इसके तहत हर घर नल का जल, शौचालय निर्माण और युवाओं को आर्थिक मदद जैसे काम किए गए. इन योजनाओं ने बिहार के गांवों की जीवनशैली को बुनियादी रूप से बदलने का काम किया है.