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क्या आपने कभी सोचा है कि किसी को एक ही घर में खाना खाने के लिए एक देश से दूसरे देश जाना पड़े और सोने के लिए दूसरे देश में आना पड़े? जी हां, यह सब एक ही घर में हो रहा है और ये कोई फिल्मी कहानी नहीं है बल्कि भारत के नागालैंड की सच्ची हकीकत है. यहां का लोंगवा गांव भारत-म्यांमार सीमा पर बसा हुआ है जहां गांव के राजा का घर दो देशों में बंटा हुआ है.
बिना वीजा और पासपोर्ट के करते हैं दो देशों में यात्रा

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बता दें कि इस घर का किचन म्यांमार में है और बेडरूम भारत में है. यानी परिवार के सदस्य खाना बनाने के लिए म्यांमार जाते हैं और सोने भारत में वापस लौट आते हैं. बिना किसी पासपोर्ट और वीजा के वे हर रोज दोनों देशों के बीच घूमते रहते हैं. नागालैंज के मोन जिले में स्थित लोंगवा गांव में मौजूद है ये सबसे अनोखा घर.
क्या है इस बॉर्डर की खासियत?

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बता दें कि कोन्याक नागा जनजाति का गढ़ है. यह जनजाति अपनी हेडहंटिंग परंपरा के लिए मशहूर रही है लेकिन आज यह शांतिपूर्ण जीवन जी रही है. गांव के चीफ यानी राजा का घर ठीक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बना है. सीमा की काल्पनिक लाइन घर के बीच से गुजरती है. घर के एक हिस्से में भारत है तो वहीं दूसरे हिस्से में म्यांमार है. पर्यटक जब इस घर में घुसते हैं तो वह भी हैरान रह जाते हैं. व्लॉगर और यूट्यूबर्स यहां आकर इस घर की वीडियो बनाते हैं. एक व्लॉगर ने हाल ही में एक वीडियो शेयर किया था जिसमें उसने बताया, 'यह बेडरूम भारत में है और यहां का किचन म्यांमार में है.'
चाय भारत में और नाश्ता म्यांमार में होता है

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राजा के परिवार में दो रानियां और नौ बच्चे हैं. वे बताते हैं कि उनके लिए यह जिंदगी बिल्कुल नॉर्मल है. सुबह उठते हैं चाय भारत में पीते हैं फिर नाश्ता बनाने म्यांमार में जाते हैं. खाना बनाकर भारत में आकर खाते हैं. सोने का समय होते ही बेडरूम में भारत लौट आते हैं. बच्चे स्कूल भारत में जाते हैं लेकिन खेलने के लिए म्यांमार की तरफ भी निकल जाते हैं. यहां के कई घरों में किचन भारत में तो बेडरूम म्यांमार में. लोग कहते हैं कि सीमा उनके लिए दीवार नहीं बल्कि सिर्फ एक लाइन है.
भारत सरकार ने बाड़ लगाने की बनाई है योजना

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यह गांव भारत और म्यांमार दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक पुल का काम करता है. यहां के लोग दोहरी नागरिकता जैसा जीवन जीते हैं. उन्हें पासपोर्ट या वीजा की भी जरूरत नहीं पड़ती है. वे बिना किसी रोक-टोक के दोनों तरफ आ-जा सकते हैं. कोन्याक जनजाति की भाषा, संस्कृति और परंपराएं दोनों देशों में एक समान है. शादी-ब्याह, त्योहार सब साथ मनाए जाते हैं. लेकिन हाल के कुछ वर्षों में भारत सरकार ने सीमा पर बाड़ लगाने की योजना बनाई है जिससे इस अनोखी जिंदगी पर असर पड़ सकता है. लोग चिंतित है कि अगर बाड़ लग गई तो उनका घर बंट जाएगा और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी असर पड़ेगा.