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Sadak Par Kaner Ka Paudha: आपने अक्सर हाईवे और शहरों की सड़कों के बीच बने डिवाइडर पर एक जैसे पौधे लगे देखे होंगे. इनमें सबसे ज्यादा नजर आने वाला पौधा है कनेर. सवाल उठता है कि आखिर इसी पौधे को ही क्यों चुना जाता है? इसके पीछे सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि मजबूत वैज्ञानिक कारण छिपे होते हैं. ये कारण क्या हैं, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं.
कम पानी में हरा-भरा रहना

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कनेर एक ऐसा पौधा है जो बेहद कम पानी में भी आसानी से जीवित रह सकता है. सड़क के डिवाइडर पर नियमित सिंचाई करना मुश्किल होता है, इसलिए इस पौधे को चुना जाता है.
धूप और प्रदूषण झेलने की ताकत

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बहुत कम पौधे होते हैं जो धूप झेलते हैं. डिवाइडर पर लगे पौधों को दिनभर तेज धूप, धूल और वाहनों के धुएं का सामना करना पड़ता है. कनेर इन सभी परिस्थितियों को आसानी से सहन कर लेता है.
कम रखरखाव की जरूरत

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कनेर को बार-बार काटने-छांटने या खाद देने की जरूरत नहीं होती. नगर निगम के लिए यह एक किफायती ऑप्शन बन जाता है. बाकी पौधे लगाने पर अक्सर सूख जाते हैं
सुंदरता और हरियाली बनाए रखना

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कनेर में साल भर फूल खिलते रहते हैं. इससे सड़कें सुंदर दिखती हैं और शहर का वातावरण भी आकर्षक बनता है. त्योहार के मौके पर इसे लाइट्स से सजाया जाता है.
जानवर बनाते हैं कनेर के पौधे से दूरी

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कनेर का पौधा हल्का जहरीला होता है, इसलिए जानवर इसे नहीं खाते हैं. इससे पौधे लंबे वक्त तक जिंदा रहते हैं और जल्दी खराब नहीं होते. इसलिए इसे छूने या खाने से बचना चाहिए.