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हम रोजमर्रा की चीजों पर एक्सपायरी डेट देखते हैं, लेकिन क्या पेट्रोल और डीजल भी समय के साथ खराब होते हैं? यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है. इस स्टीरी में हम आपके इसी सवाल का जवाब देंगे, जिसको जानने के बाद आप सच में हैरान रह जाएंगे.

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सच यह है कि ईंधन की भी एक सीमित स्टोरेज लाइफ होती है, जिसके बाद उसकी गुणवत्ता घटने लगती है. पेट्रोल और डीजल हवा, नमी और तापमान के संपर्क में आने पर रासायनिक बदलाव से गुजरते हैं. धीरे-धीरे ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया शुरू होती है, जिससे ईंधन की ताकत कम होने लगती है. इसका असर इंजन की परफॉर्मेंस पर भी दिखाई दे सकता है.

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आजकल मिलने वाले पेट्रोल में इथेनॉल मिलाया जाता है. इथेनॉल पानी को आसानी से सोख लेता है, जिससे फेज सेपरेशन की समस्या पैदा हो सकती है. ऐसे में पेट्रोल दो से तीन महीने के भीतर ही खराब होना शुरू कर सकता है, खासकर अगर सही तरीके से स्टोर न किया जाए.

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अब सवाल उठता है कि क्या हो अगर ईंधन गाड़ी में भरवाकर रख दें और उसे चलाए नहीं? अगर वाहन लंबे समय तक बिना चलाए खड़ा रहे, तो टंकी में भरा पेट्रोल एक महीने बाद ही अपनी गुणवत्ता खोने लगता है. छह से आठ महीने तक इस्तेमाल न होने पर गाड़ी स्टार्ट करने में दिक्कत आ सकती है और इंजन पर भी असर पड़ सकता है.

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डीजल रासायनिक रूप से पेट्रोल की तुलना में ज्यादा स्थिर माना जाता है. यही कारण है कि डीजल आमतौर पर छह महीने से एक साल तक उपयोग योग्य रह सकता है. हालांकि, यह भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता और समय के साथ इसमें बदलाव आ सकते हैं.

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डीजल में नमी पहुंचने पर बैक्टीरिया और फंगस पनप सकते हैं. इसे माइक्रोबियल ग्रोथ कहा जाता है. इससे ईंधन गाढ़ा हो सकता है और इंजन के फिल्टर जाम होने की समस्या बढ़ सकती है. इसलिए डीजल को भी सावधानी से स्टोर करना जरूरी है.

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ईंधन को खुली हवा, तेज धूप, ज्यादा गर्मी और नमी से बचाकर रखना चाहिए. ये सभी तत्व फ्यूल को जल्दी खराब कर सकते हैं. अगर आप ट्रैवलिंग के लिए अतिरिक्त पेट्रोल या डीजल स्टोर कर रहे हैं, तो सही कंटेनर का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है. (Image: Pexels)