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क्या आप जानते हैं मौसम में हुए इस बदलाव का असर आने वाले समय में इतना भयंकर होने वाला है कि भारत समेत अन्य देशों की करोड़ों की आबादी की जिंदगी तहस-नहस हो सकती है. रिसर्च बताती है कि प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग के कारण वातावरण में हो रहे बदलाव का असर ग्लेशियर, नदिया और समुद्र पर सीधा पड़ रहा है. आइए जानते हैं पूरी रिपोर्ट यहां.
हिमालय में तेज गर्मी ने बढ़ाई चिंता

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दुनियाभर में बढ़ते तापमान का असर अब पहाड़ों पर साफ दिखाई देने लगा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिमालय क्षेत्र में बर्फ तेजी से कम हो रही है, वैज्ञानिक मानते हैं कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में बड़ा जल संकट पैदा हो सकता है.
करोड़ों लोगों की जिंदगी होगी प्रभावित

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हिमालय के ग्लेशियर भारत, नेपाल, भूटान और पाकिस्तान समेत कई देशों के लिए पानी का बड़ा स्रोत हैं. इन्हीं से निकलने वाली नदियां करोड़ों लोगों को पीने का पानी, खेती के लिए सिंचाई और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करती हैं, लेकिन जब इन ग्लेशियर पर असर पड़ेगा, तो सीधे तौर पर इंसानियत पर भी असर पड़ेगा.
क्यों तेजी से पिघल रही है बर्फ?

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विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण, जंगलों की कटाई, बढ़ता शहरीकरण और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन इसका मुख्य वजह हैं. गर्म हवाएं और कम बर्फबारी भी ग्लेशियरों को कमजोर कर रही हैं, जिससे उनका आकार लगातार घट रहा है और वह कम होते जा रहे हैं.
गंगोत्री ग्लेशियर पर सबसे बड़ा असर

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रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड का गंगोत्री ग्लेशियर गंगा नदी का प्रमुख स्रोत माना जाता है. यह हर साल पीछे खिसक रहा है, पिछले कई दशकों में इसकी लंबाई काफी कम हुई है, जो गंभीर चेतावनी मानी जा रही है.
नदियों और खेती पर पड़ सकता है असर

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अगर ग्लेशियर तेजी से पिघलते रहे तो शुरुआत में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. ऐसा होता रहा तो, बाढ़ के बाद में नदियों में पानी कम होने लगेगा, जिससे खेती, बिजली उत्पादन और ग्रामीण इलाकों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा.
नेपाल और आसपास के देशों में भी संकट

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नेपाल जैसे पर्वतीय देशों में अनियमित बारिश, भूस्खलन और अचानक बाढ़ की घटनाएं बढ़ रही हैं. जलवायु परिवर्तन के कारण वहां के गांवों, खेती और जल स्रोतों पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है.
हिंदूकुश हिमालय इतने सालों में पिघल सकता है 75% बर्फ

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हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र में बसे देश भारत, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान जहां दुनिया की खासी आबादी रहती है, यहां इन प्रभावों का अधिक जोखिम बना हुआ है. ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र के ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने के कारण सदी के अंत तक 75% बर्फ के खत्म होने का खतरा है.
वैज्ञानिकों की बड़ी चेतावनी

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अंतरराष्ट्रीय संस्था जैसे ICIMOD की चेतावनी के अनुसार, यदि वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं रोका गया, तो इस सदी के अंत तक 80% ग्लेशियर खत्म हो सकते हैं, जिसका सीधा असर पारिस्थितिकी तंत्र और मानव जीवन पर पड़ेगा. क्योंकि हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र महत्वपूर्ण पर्वत श्रृंखला है जो एशिया के 8 देशों में फैली हुई है.
इस साल गर्मी पड़ने की सबसे बड़ी वजह

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मौसम में हो रहे बदलाव को लेकर वैज्ञानिकों की टीम का कहना है कि साल 2026 में एक बहुत मजबूत अल-नीनो बनने वाला है. इसे अल-नीनो या गॉडजिला अल-नीनो भी लोग कह रहे हैं. ब्रिटेन के मौसम विभाग के अनुसार, पिछले एक महीने में ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर में तापमान इतनी तेजी से बढ़ रहा है जितना इस सदी में पहले कभी नहीं बढ़ा.
क्या है अल-नीनो?

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अल-नीनो या सूपर अल-नीनो या 'मेगा अल-नीनो' प्रशांत महासागर में एक अत्यंत शक्तिशाली मौसमी घटना है, जहां समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से +2 डिग्री या उससे अधिक गर्म हो जाता है. यह दुर्लभ और विनाशकारी जलवायु चक्र भीषण गर्मी, सूखे और वैश्विक स्तर पर फसलों की बर्बादी का कारण बनता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इसी के कारण 2026-2027 में भीषण गर्मी का खतरा बढ़ रहा है. (Image: AI)