दुनिया में आज ऐसा दौर शुरू हो चुका है कि जो चीज पहले नामुमकिन मानी जाती थी, अब वह मुमकिन होती जा रही है, जिसमें सबसे बड़ा हाथ विज्ञान का है. विज्ञान ने अपने क्षेत्र में इतनी तेजी से प्रगति की है कि वह रेगिस्तान को फिर से हरा-भरा बनाने की कोशिश में लगे हैं. इतना ही नहीं, इसका रिजल्ट भी काफी हैरान करने वाला सामने आ रहा हैं
दुनिया में तेजी से बढ़ रहे हैं सूखे इलाके

2 / 8
रिपोर्ट्स बताते हैं कि, जलवायु परिवर्तन, पानी की कमी और जंगलों की कटाई के कारण दुनिया के कई हिस्सों में जमीन बंजर हो रही है. हर साल बड़ी मात्रा में उपजाऊ भूमि खराब होकर रेगिस्तानी रूप लेने लगती है, जिस कारण रेगिस्तान का फैलाव होता जा रहा है.
रेगिस्तान बनते कैसे हैं?

3 / 8
वैज्ञानिकों के अनुसार, जहां बहुत कम बारिश होती है और गर्म हवाएं नमी खत्म कर देती हैं, वह इलाके रेगिस्तान बनने लगते हैं. कुछ इलाकों में सालभर बेहद कम बारिश होती है और सूखा पड़ने लगता है, वह इलाके वक्त के साथ-साथ रेतीले हो जाते हैं और रेगिस्तान का रूप ले लेते हैं.
क्या इन्हें दोबारा हरा बनाया जा सकता है?

4 / 8
विशेषज्ञ मानते हैं कि सही योजना, पानी प्रबंधन और पौधारोपण से कई रेगिस्तानी इलाकों को बदला जा सकता है. हालांकि इसमें समय, तकनीक और भारी निवेश की जरूरत होती है. हालांकि सीधा जवाब यही निकलकर आता है कि ऐसा संभव है.
पानी रोकना से बदलेगी दुनिया

5 / 8
रेगिस्तान में बारिश कम होती है, लेकिन जब होती है तो तेज होती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर उस पानी को बांध, तालाब, खाइयों और नहरों में रोका जाए तो खेती और हरियाली रेगिस्तानी इलाकों में काफी हद तक संभव हो सकती है.
सऊदी अरब ने किया दुनिया को हैरान

6 / 8
सऊदी अरब के कुछ इलाकों में पानी रोकने के लिए टैरेस, छोटे बांध और गहरी खाइयां बनाई गईं. इसका नतीजा यह हुआ कि सूखी जमीन पर घास और पौधे उगने लगे.
चीन का बड़ा ग्रीन प्रोजेक्ट बना मिसाल

7 / 8
चीन ने गोबी रेगिस्तान के फैलाव को रोकने के लिए 'ग्रेट ग्रीन वॉल' जैसे बड़े अभियान चालू कर रखें हैं. इसके तहत करोड़ों पेड़ लगाए गए, जिससे धूल भरी आंधियां कम करने में मदद मिली और रेगिस्तान के फैलाव को रोकने में सफलता मिलती भी दिखाई दे रही है.
भविष्य में बदल सकती है धरती की तस्वीर

8 / 8
अगर दुनिया के सभी देश मिलकर जल संरक्षण, पेड़ लगाने और टिकाऊ खेती पर काम करें, तो कई सूखे इलाकों को फिर से उपजाऊ बनाया जा सकता है.
अस्वीकरण: यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और पब्लिक डोमेन में मौजूद अन्य स्रोतों पर आधारित हैं. News24 इनकी पुष्टि नहीं करता है. (Image: Pexels/AI)