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आज की दौड़भाग वाली जिंदगी में हर कोई चाहता है कि उसे थोड़ा सा आराम मिले. भारत में घंटों ऑफिस में काम करने के बाद भी कई बार घर पर भी आराम नहीं मिल पाता, जिसकी वजह से लोग कई गंभीर बीमारियों का शिकार होते जा रहे हैं. इस बीच एक देश ऐसा भी है, जो फास्ट लाइफ को नहीं, बल्कि स्लो जिंदगी को सपोर्ट करता है.
कौन सा है ये अनोखा देश?

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इसी फिलोसोफी को फॉलो करते हुए ताइवान के एक शहर में घोंघों की रेस आयोजित की जाती है. इस रेस में शामिल होने के लिए लोग दूर-दूर से अपने पालतू घोंघे को लाते हैं. जी हां, हम बात कर रहे हैं ताइवान के फेंगलिन शहर की जो आज उन जगहों में शामिल है, जहां धीमी जिंदगी को एक त्योहार की तरह सेलिब्रेट किया जाता है.
'स्लो' लाइफ जीते हैं यहां के लोग

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यह शहर तेज भागदौड़ के बजाय सुकून, संतुलन और प्रकृति के करीब रहने की सोच को आगे बढ़ाता है, और इसी वजह से यहां की घोंघा रेस लोगों के लिए आकर्षण बन गई है. साल 2014 में Cittaslow नेटवर्क से जुड़ने के बाद फेंगलिन ने खुद को एक स्लो सिटी के रूप में स्थापित किया.
स्थिर जीवन का प्रतीक घोंघा

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इस नेटवर्क का प्रतीक घोंघा है, जो धीमे लेकिन स्थिर जीवन का संदेश देता है, और यही भावना इस शहर की पहचान का हिस्सा बन गई है. 2024 के भूकंप ने जब स्थानीय पर्यटन पर असर डाला, तो शहर के लोगों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को फिर से केंद्र में लाने का निर्णय लिया.
पर्यटकों की बढ़ी दिलचस्पी

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हाल ही में आयोजित घोंघा रेस ने न केवल स्थानीय उत्साह को बढ़ाया, बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटकों की दिलचस्पी भी दोबारा जगाया. रेस का तरीका जितना सरल है, उसका आकर्षण उतना ही अनोखा है.
कैसे होती है ये रेस?

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घोंघों को एक गोल टेबल के बीच रखा जाता है और जो सबसे पहले 33 सेंटीमीटर दूर किनारे तक पहुंचता है, उसे विजेता घोषित किया जाता है, इस बार ‘ब्रदर स्नेल’ ने यह रेस 3 मिनट 3 सेकंड में जीत ली.
घोंघों की खास देखभाल

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प्रतिभागी अपने घोंघों को खास देखभाल के साथ तैयार करते हैं, जिसमें ताजे फल, सब्जियां और शकरकंद के पत्ते शामिल होते हैं. कुछ प्रतिभागी तो अपने घोंघों के साथ लंबी दूरी तय कर यहां पहुंचते हैं, जो इस आयोजन के प्रति उनके जुड़ाव को दिखाता है.
ये भी है आकर्षक का केंद्र

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फेंगलिन की खासियत सिर्फ यही रेस नहीं है, बल्कि यहां के ई-बाइक टूर, जापानी काल की इमारतें, पुराने तंबाकू गोदाम और हक्का संस्कृति भी पर्यटकों को आकर्षित करती है. यही कारण है कि यह शहर धीमी जिंदगी के संदेश को एक व्यवहारिक और सांस्कृतिक अनुभव में बदल देता है.