सफेद क्यों होती है कोलकाता पुलिस की वर्दी? जबकि बाकी राज्यों में खाकी है पहचान

पुलिस का नाम सुनकर आपके दिमाग में सबसे पहले खाकी की इमेज आती होगी। फिल्मी दुनिया से लेकर हकीकत की दुनिया तक खाकी ही पुलिस की पहचान होती है। कई बार तो हम पुलिस की जगर केवल खाकी शब्द ही प्रयोग कर लेते हैं। इसका सीधा मतलब पुलिस से होता है। लेकिन आपने ये भी देखा होगा कि कोलकाता की पुलिस खाकी वर्दी नहीं पहनती है। कोलकाता पुलिस की वर्दी सफेद रंग की होती है। इसके पीछे क्या वजह है, आइए विस्तार से समझते हैं...

Kolkata Police uniform
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कोलकाता में मतदान का समय नजदीक आने के साथ ही, यह शहर न केवल अपनी राजनीति बल्कि अपनी अनूठी पहचान के कारण भी एक बार फिर चर्चा में है। सबसे उल्लेखनीय अंतरों में से एक सड़कों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। जहां भारत भर में पुलिस बल खाकी वर्दी पहनते हैं, वहीं कोलकाता पुलिस अपनी साफ-सुथरी सफेद वर्दी में अलग दिखती है। यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। आइए इसके पीछे का कारण जानते हैं।

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अनूठी विरासत

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  इस परंपरा की जड़ें सन् 1690 तक जाती हैं। इसी दौरान जॉब चार्नॉक इस क्षेत्र में आए और आधुनिक कोलकाता की नींव रखी। जैसे-जैसे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने आसपास के गांवों पर प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित करना शुरू किया, एक औपचारिक पुलिस व्यवस्था की आवश्यकता स्पष्ट हो गई। सन् 1845 में जब कोलकाता पुलिस की आधिकारिक स्थापना हुई, तो ब्रिटिश शासकों ने बल को एक विशिष्ट पहचान देने के लिए सफेद वर्दी का चयन किया। यह पहचान आज भी कायम है।  

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मौसम की अहम भूमिका 

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मौसम की अहम भूमिका कोलकाता का मौसम कोई मज़ाक नहीं है। यहाँ गर्मी, उमस और अक्सर थकावट रहती है। वैज्ञानिक रूप से, सफेद रंग सूर्य की रोशनी को परावर्तित करता है और कम गर्मी अवशोषित करता है, जिससे यह उन पुलिस अधिकारियों के लिए अधिक आरामदायक होता है जिन्हें लंबे समय तक बाहर काम करना पड़ता है। इसके विपरीत, खाकी जैसे गहरे रंग अधिक गर्मी अवशोषित करते हैं, इसलिए ऐसे मौसम के लिए उपयुक्त नहीं होते।

राज्य पुलिस से अंतर

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राज्य पुलिस से अंतर पश्चिम बंगाल पुलिस, भारत के अधिकांश राज्यों की तरह, अपनी मानक खाकी वर्दी पहनती है। कोलकाता पुलिस की सफेद वर्दी लोगों को शहर पुलिस और राज्य पुलिस के बीच आसानी से अंतर करने में मदद करती है।

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अन्य राज्यों में खाकी वर्दी क्यों 

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अन्य राज्यों में खाकी वर्दी क्यों खाकी वर्दी की अपनी एक कहानी है। इसे 1847 में भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान हैरी लम्सडेन द्वारा शुरू किया गया था। इसके पीछे का विचार सरल था: सफेद वर्दी जल्दी गंदी हो जाती थी, लेकिन खाकी वर्दी दाग-धब्बों और गंदगी को बेहतर ढंग से छुपाती थी।

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लेखक के बारे में

Raghav Tiwari

Raghav Tiwari

राघव तिवारी न्यूज24 में शिफ्ट हेड की भूमिका निभा रहे हैं। यहां टीम प्रबंधन के साथ नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, क्राइम आदि की खबरें भी कवर करते हैं। इससे पहले ये अमर उजाला, नईदुनिया, नवभारत टाइम्स (NBT) और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में रिपोर्टिंग कर चुके हैं। देवभूमि उत्तराखंड, इंदौर, नोएडा, कानपुर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में काम करने की वजह से राघव भिन्न-भिन्न कल्चर, खानपान, व्यवहार, जरूरत की समझ रखते हैं। राघव तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन की शिक्षा पूरी की है। शिकायत और सुझाव के लिए स्वागत है- Mail ID: raghav.tiwari@bagconvergence.in Contact No. 8840671098
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