तकरीबन 5 घंटों में करीब 46 किलोमीटर का सफर तय करने वाली ये ट्रेन, खूबसूरत नीलगिरि पहाड़ियों के बीच एक सिंपल जर्नी को यादगार नजारों वाले एक्सपीरिएंस में बदल देती है. अगर आपने शाहरुख खान की मूवी 'दिल से' का सॉन्ग 'चल छैंया-छैंया' सुना है, तब ये सफर आपको उस गीत को गुनगुनाने के लिए मजबूर कर देगा.
ट्रेन इतनी धीमी क्यों चलती है?

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नीलगिरि माउंटेन रेलवे भारत के सबसे मुश्किल पहाड़ी इलाकों में से एक में चलती है. इस रास्ते में खड़ी चढ़ाई, तीखे मोड़, संकरे ट्रैक, कई सुरंगें, पुल और गहरी घाटियां हैं, जिनकी वजह से तेज रफ्तार से सफर करना नामुमकिन है. पहाड़ियों पर महजूफ तरीके से चढ़ने के लिए, रेलवे एक अनोखे 'रैक-एंड-पिनियन' सिस्टम का इस्तेमाल करती है, जो इंजीनियरिंग की एक ऐसी तकनीक है जो भारत में बहुत कम देखने को मिलती है. धीमी रफ्तार से पैसेंजर्स की की सेफ्टी एनश्योर होती है और पुराने जमाने का इंजन मुश्किल रास्तों पर आसानी से चल पाता है.
UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज रेलवे

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नीलगिरि माउंटेन रेलवे सिर्फ सैलानियों के आकर्षण का केंद्र नहीं है. ये UNESCO की 'भारत की माउंटेन रेलवे' लिस्ट का हिस्सा है, जिसे इसकी बेहतरीन इंजीनियरिंग और ऐतिहासिक अहमयित के लिए पहचाना जाता है. 20वीं सदी की शुरुआत में बनी ये रेल ट्रैक तकरीबन 16 सुरंगों, 250 से ज्यादा पुलों और 200 से ज्यादा मोड़ों से होकर गुजरती है. सफर के दौरान जंगल, झरने, घाटियां और चाय के बड़े-बड़े बागानों के शानदार नजारे देखने को मिलते हैं.
लोग आज भी इसे क्यों पसंद करते हैं?

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मॉडर्न हाईवे की वजह से रोड ट्रिप के जरिए से ऊटी पहुंचना आसान हो गया है, फिर भी हर साल हजारों पर्यटक नीलगिरि माउंटेन रेलवे को चुनते हैं. इसका अट्रैक्शन इसके पुराने जमाने के एहसास, नीले रंग के पुराने कोच, पहाड़ों के खूबसूरत नजारों और आराम से चलने की रफ्तार में है. मंजिल तक जल्दी पहुंचने की जल्दबाजी करने के बजाय, मुसाफिर भारत की सबसे मशहूर हेरिटेज रेलवे में से एक को एक्सपीरिएमस करते हुए सफर के हर पल का लुत्फ लेते हैं.
ये सफर इतना खास क्यों है?

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ये ट्रेन अपने शानदार नजारों और सदाबहार अट्रै्क्शन के लिए दुनिया भर में मशहूर हो गई है. शाहरुख खान और मलाइका अरोड़ा की फिल्म 'दिल से' के मशहूर गाने 'छैंया छैंया' में दिखाए जाने के बाद इसे और भी ज्यादा पॉपुलैरिटी मिली. इस सफर के दौरान यात्रियों को धुंध से ढकी पहाड़ियां, घने जंगल, चाय के बागान, झरने और खूबसूरत हिल स्टेशन देखने को मिलते हैं, जो इसे भारत के सबसे खूबसूरत रेलवे रूट में से एक बनाते हैं.
बेस्ट टाइम टू ट्रैवल

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नीलगिरि माउंटेन रेलवे की जर्नी करने का सबसे अच्छा वक्त अक्टूबर से जून के बीच है, जब मौसम सुहावना रहता है और पहाड़ों के नजारे सबसे साफ दिखाई देते हैं. मॉनसून के मौसम में पहाड़ियां बहुत हरी-भरी और खूबसूरत हो जाती हैं, हालाँकि भारी बारिश के कारण कभी-कभी सर्विस में देरी हो सकती है.
यहां कैसे पहुंचें?

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ये सफर मेट्टुपालयम रेलवे स्टेशन से शुरू होता है, जो कोयंबटूर से रेगुलर ट्रेन सर्विस के जरिए अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. फ्लाइट के जरिए आप कोयंबटूर इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक आ सकते हैं, जो यहां से लगभग 40 किलोमीटर दूर है. मेट्टुपालयम तक कोयंबटूर और आस-पास के शहरों से रोड के जरिए रेगुलर बस और टैक्सी सर्विस से भी आसानी से पहुंचा जा सकता है. जो लोग यादगार ट्रेन जर्नी को एक्सपीरिएंस करना चाहते हैं, उनके लिए नीलगिरि माउंटेन रेलवे ये साबित करता है कि कभी-कभी सबसे धीमा सफर ही सबसे यादगार तजुर्बा बन जाता है.