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दुनिया के नक्शे पर एक ऐसा रईस देश भी मौजूद है जहां जीवन की सबसे बड़ी जरूरत यानी नदी का नामोनिशान तक नहीं है. बिना किसी प्राकृतिक जल स्रोत के भी यह मुल्क अपनी तरक्की से पूरी दुनिया को हैरान कर रहा है.
कहां गायब हो गई नदियां?

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सऊदी अरब दुनिया का वह विशाल देश है जहां एक भी स्थायी नदी नहीं बहती है. यहां की जलवायु इतनी शुष्क और गर्म है कि बारिश की एक बूंद भी जमीन पर गिरते ही तुरंत भाप बनकर उड़ जाती है.
क्यों नहीं है पानी का स्रोत?

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सऊदी में कोई ग्लेशियर या बर्फीले पहाड़ नहीं हैं जहां से नदियों का जन्म हो सके. यहाँ सिर्फ सूखी घाटियां यानी वाडी मिलती हैं जिनमें साल में एकाध बार बारिश होने पर ही कुछ देर के लिए पानी नजर आता है.
कैसे बुझती है करोड़ों की प्यास?

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नदी न होने के बावजूद सऊदी अरब ने आधुनिक तकनीक के दम पर समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाने में महारत हासिल कर ली है. यहां के बड़े-बड़े डीसैलिनेशन प्लांट दिन-रात खारे पानी को साफ करके पीने लायक बनाते हैं.
क्या है जमीन के नीचे का राज?

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पीने के पानी के लिए यह देश हजारों साल पुराने भूमिगत जल यानी फॉसिल वाटर पर भी निर्भर रहता है. रेगिस्तान के नीचे जमा इस सीमित पानी को बड़ी सावधानी और तकनीक के साथ बाहर निकालकर इस्तेमाल किया जाता है.
भविष्य की क्या है तैयारी?

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सऊदी अरब अपनी पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए विशाल पाइपलाइन नेटवर्क और स्टोरेज टैंकों का इस्तेमाल करता है. कम बारिश के बावजूद यहां मैनेजमेंट इतना शानदार है कि आम जनता को पानी की किल्लत महसूस नहीं होती. रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब में बहुत कम बारिश होती है. यहां साल भर में औसतन सिर्फ 103 mm बारिश होती है.